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MILLET—जोधपुर से पास और फेल होता है देश का बाजरा

- अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना केन्द्र में पूरे देश की बाजरा की किस्मों का हो रहा है परीक्षण - गत 10 वर्षो में 76 और इस वर्ष 4 किस्में विकसित की
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जोधपुर

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Amit Dave

Nov 06, 2020

MILLET---जोधपुर से  पास और फेल   होता है देश का बाजरा

MILLET---जोधपुर से पास और फेल होता है देश का बाजरा

जोधपुर।

देश में खाए जाने वाले बाजरा जोधपुर से पास और फेल होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वित्तपोषित अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना जोधपुर में कार्यरत है। केन्द्र पर पूरे देश में सरकारी व निजी कंपनियों को बाजरा की किस्मों को विकसित करने से पहले यहां परीक्षण करवाना होता है। परीक्षण में खरा उतरने पर ही किस्म को देश के किसानों को बोने के लिए उपलब्ध कराया जाता है। देश में बाजरा का क्षेत्रफल सर्वाधिक अर्थात करीब 44 लाख हैक्टेयर क्षेत्र राजस्थान में होने के कारण जोधपुर (राजस्थान) में वर्ष 1995-96 में यह परियोजना केन्द्र स्थापित किया गया। यहां प्रदेश सहित पूरे देश में बोए जाने वाले बाजरा का परीक्षण होने लगा। साथ ही, नई किस्मों (संकर व संकुल) किस्में विकसित होने लगी पूरे देश में बाजरे का करीब 70-90 लाख हैक्टेयर क्षेत्र है।

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इस वर्ष 4 किस्में पास

परियोजना के अंतर्गत देश की अलग-अलग सरकारी व निजी कंपनियों से प्राप्त बाजरा की किस्मों का परीक्षण किया जा रहा है। अब तक तीन हजार से ज्यादा किस्मों का परीक्षण किया गया। वहीं गत 10 वर्षो में 76 व इस वर्ष 4 किस्में विकसित की गई।परीक्षण के दौरान पुष्प आने का समय, पकने का समय, पौधों की लंबाई, सिटे की लंबाई-मोटाई, दाने व सूखे चारे की उपज, बीमारी व कीड़ों की सहनशीलता के मापदण्ड, दाने का आकार-वजन आदि का परीक्षण किया जाता है।

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15 साल का कार्यकाल होता है एक वैरायटी का

परियोजना के जोधपुर स्थित केन्द्र पर देशभर की सरकारी व निजी कंपनियां बाजरा के विभिन्न किस्म के सेंपल भेजते है। तीन वर्षो तक परीक्षण में सेंपल के सफल होने पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से गठित सेन्ट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी (सीवीआरसी) की ओर से सफल किस्म का अनुमोदन कर केन्द्र सरकार को अनुशंषा के लिए भेजी जाती है, केन्द्र सरकार का अनुमोदन मिलते ही किस्म को विकसित करने के लिए देश के किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। एक किस्म का कार्यकाल 15 वर्ष का होता है।

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