
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर होते ही पेश हो गई नाबालिग
जोधपुर.
जालोर स्थित अपने घर से करीब दो माह पूर्व किसी से कहे सुने बिना गायब नाबालिग को पुलिस तो ढूंढ नहीं पाई, लेकिन परिजन की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करते ही वह वकील के साथ अदालत में पेश हो गई।
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ ने इस नाबालिग को बालिग प्रमाणित होने तक बालिका गृह में भेजने के आदेश दिए हैं।
आदेश में कहा गया है कि बालिका गृह में रहने के दौरान बालिका की सुरक्षा की जाए। मामले के अनुसार नाबालिग के पिता ने गत वर्ष 21 नवम्बर 2018 को जालोर के कोतवाली थाने में नाबालिग के गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाया था।
लेकिन पुलिस उसे नहीं ढूंढ पाई। पुलिस की निष्क्रियता से परेशान हो उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष पेश नाबालिग ने परिजन के साथ जाने से इनकार कर दिया। इस पर कोर्ट ने उसे जोधपुर के बालिका गृह में भेजने के साथ ही उसकी सुरक्षा के भी निर्देश दिए हैं।
Published on:
11 Jan 2019 01:35 am
