बैलून वाल्वोप्लास्टी से खोला हृदय का सिकुड़ा माइट्रल वाल्व

 

 

एम्स जोधपुर

By: Abhishek Bissa

Updated: 07 Sep 2021, 10:01 PM IST

जोधपुर. एम्स जोधपुर के कार्डियोलॉजी विभाग ने दो रोगियों में बैलोन माइट्रल वाल्वुलोप्लास्टी की, जिन्हें पिछले 2-3 वर्षों से अनगिनत बार सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी। इन मरीजों को दिल की बीमारी थी, जिसे माइट्रल स्टेनोसिस के नाम से जाना जाता है।
एम्स जोधपुर के एकेडमिक डीन और कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ कुलदीप सिंह ने बताया कि माइट्रल वाल्व हृदय के बाएं एट्रियम से बाएं वेंट्रिकल में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है। बायां वेंट्रिकल आपके दिल का मुख्य पंपिंग कक्ष है। जब आपका माइट्रल वाल्व सिकुडऩे के कारण ठीक से काम नहीं कर रहा होता है तो दबाव के कारण बायां एट्रियम बढ़ जाता है। द्रव फेफ ड़ों में प्रवेश कर जाता है। जिससे माइट्रल स्टेनोसिस के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे कि सांस की तकलीफ और थकान। माइट्रल स्टेनोसिस के अन्य लक्षणों में तेजी से वजन बढऩा, कमजोरी, सिर चकराना, टखनों, पैरों या पेट में सूजन और अनियमित दिल की धड़कन शामिल हो सकता है ।

माइट्रल वाल्व स्टेनोसिस का सबसे आम कारण रूमेटीक हृदय रोग है, जो स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण की जटिलता के रूप में होता है। यह संक्रमण माइट्रल वाल्व के संकुचन का कारण बन सकता है। भारत जैसे विकासशील देशों में रूमेटीक बुखार अभी भी आम है। यह प्रक्रिया कार्डियोलॉजी के सहायक आचार्य डॉ अतुल कौशिक के नेतृत्व वाली टीम ने नर्सिंग स्टाफ और कार्डियक टेक्निशियन की मदद से की। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुरेंद्र देवड़ा और डॉ राहुल चौधरी ने भी प्रक्रिया में मदद की। डॉ आलोक शर्मा और डॉ सुरेंद्र पटेल के नेतृत्व में सीटीवीएस की टीम ने भी योगदान दिया। रोगियों को तीसरे दिन छुट्टी दे दी गई।

जानिए बैलोन वाल्वुलोप्लास्टी क्या है

कार्डियोलॉजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ अतुल कौशिक ने बताया कि बैलोन वाल्वुलोप्लास्टी को पीटीएमसी भी कहा जाता है। इसमें एक बैलून को लोकल एनेस्थिसिया के जरिए एंजियोग्राफ ी की तरह वाल्व तक ले जाकर फु ला दिया जाता है और वाल्व को खोल दिया जाता है।

Abhishek Bissa Reporting
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