
फाइल फोटो
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. पर्यावरण सुरक्षा के लिए निर्धारित वननीति के मापदंड के अनुरूप 20 प्रतिशत अनिवार्य वन भूमि की तुलना में अब जोधपुर संभाग में लगातार वनभूमि का खात्मा होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण विगत दो दशक से वनभूमि का म्यूटेशन (अमल दरामद) नहीं होना है। वनमंडल जोधपुर के अधीन अमल दरामद से वंचित करीब 8500 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि वनविभाग के नाम दर्ज नहीं हो सकी है। इसके लिए कई बार लिखित में आदेश जारी होने के बावजूद मामला जस का तस है। म्यूटेशन से वंचित वन भूमि पर जब भी कोई अतिक्रमण, अवैध खनन होता है तो सीधे तौर पर रोकने का जिम्मेदार वनविभाग को बताया जाता है लेकिन जब उसी वनभूमि को वनविभाग के नाम म्यूटेशन करने की की मांग की जाती है तो प्रशासनिक अधिकारी वन विभाग के मालिकाना हक पर ही अंगुलियां उठाने लगते है। यही हालात रहे तो दशकों से म्यूटिशेन से वंचित वनभूमि की सुरक्षा में जुटे वनविभाग को वन क्षेत्रों के विकास और संरक्षण के लिए केन्द्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को बंद करना पड़ सकता है। पूरे जोधपुर संभाग में 25 हजार से अधिक हेक्टेयर भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शामिल नहीं होने के कारण कब्जे की खेती पनपती जा रही है। पूरे मामलों पर अब तक आदेशों मॉनेटरिंग व क्रियान्वयन के लिए कोई जिम्मेदार एजेन्सी तक नहीं है।
जोधपुर की वनभूमि की स्थिति
कुल वन क्षेत्र-23664.51 हेक्टेयर
राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज वन क्षेत्र-10619.95
राजस्व रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम से वंचित-13750. 78 हेक्टेयर
वनक्षेत्रों में बढ़ोतरी के लिए राज्य सरकार की योजनाएं
राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता परियोजना, नाबार्ड, जलवायु परिवर्तन एवं मरुप्रसार रोक कार्यक्रम, परिभ्रांषित वनों का पुनरारोपण, कैम्पा के तहत पौधरोपण, राज्य वनविकास अभिकरण, पर्यावरण वानिकी, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना, मनरेगा आदि सहित करीब एक दर्जन योजनाएं शामिल है लेकिन जोधपुर जिले में इन योजनाओं से केवल कैम्पा, जलवायु परिवर्तन एवं मरुप्रसार रोक योजना, आरएफबीपी और मनरेगा योजनाओं का नाममात्र क्रियान्वयन हो रहा है। जलवायु परिवर्तन योजना में भी जिले में मात्र 100 से 200 हेक्टेयर के लिए ही बजट मिल सका है।
राजस्व अधिकारियों को कई बार लिख चुके
वनभूमि अमल दरामद का काम राजस्व अधिकारियों का है। वनविभाग बार बार लगातार उनसे लिखित में कई बार निवेदन कर चुका है। अब म्यूटेशन का अधिकार तो उनके पास ही है।
मुकेश सैनी, आइएफएस, मंडल वन अधिकारी जोधपुर
Published on:
07 Oct 2020 09:30 pm
