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फिलिस्तीनी आतंकवादियों से जुड़े हैकर्स ने बनाया स्पाइवेयर

jodhpur news - थर्ड पार्टी एप से टेलीग्राम सहित अन्य मैसेजिंग एप डाउनलोड या अपडेट करने पर आ रहा संक्रमित सॉफ्टवेयर- स्क्रीन रिकॉर्डिंग, कॉल रिकॉर्डिंग, एसएमएस, कैमरा, फाइल डिलीट सहित कई कार्यों को कर रहा हैक
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फिलिस्तीनी आतंकवादियों से जुड़े हैकर्स ने बनाया स्पाइवेयर

फिलिस्तीनी आतंकवादियों से जुड़े हैकर्स ने बनाया स्पाइवेयर

जोधपुर. फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह से जुड़े हैकर्स ने नया एंड्रोइड स्पाइवेयर (संक्रमित सॉफ्टवेयर) बनाया है जो थर्ड पार्टी एप से टेलीग्राम, थ्रीमा, वीमैसेज जैसे मेसजिंग एप डाउनलोड/अपडेट करने पर मोबाइल में आ जाता है। यह यूजर्स के मोबाइल में स्क्रीन रिकॉर्डिंग, स्क्रीन शॉट, कॉल रिकॉर्डिंग, कॉल लॉग, एसएमएस/ नोटिफिकेशन पढऩा, फाइल डिलिट करना जैसे कार्य करके सूचनाएं चुरा लेता है। व्हाटसएप, फैसबुक, इंस्टाग्राम सहित समस्त सोशियल मीडिया मैसेजिंग एप में किए जाने मैसेज/ऑडियो/वीडियो कॉल को पढ़ लेता है। इससे यूजर्स की व्यक्तिगत सूचनाओं के साथ बैंकिंग संबंधी जानकारी भी चोरी हो जाती है। भारत की इंटरनेट सिक्योरिटी कम्पनी ईएसईटी ने इसके बारे में पता लगाया है।

मध्य पूर्व के ये हैकर्स एपीटी-सी-23 ग्रुप या डेजर्ट स्कोर्पियन नाम से जाने जाते हैं। यह सबसे पहले 2017 में तब सामने आया था जब फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास ने युवतियों के जरिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर इजराइली सैनिकों को फंसाना शुरू किया। वर्तमान में नए स्पाइवेयर का नाम एंड्रोइड/स्पाई सी-23.ए है। डिजिटल एप सहित अन्य थर्ड पार्टी से कोई मैसेजिंग एप डाउनलोड/अपडेट करने पर यह स्पाइवेयर मोबाइल में आ जाता है।

क्या है स्पाइवेयर
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट प्रिया सांखला ने बताया कि ऐसा सॉफ्टवेयर जो यूजर्स की सूचनाएं चुराता है। खासकर इंटरनेट यूजर्स के मूवमेंट के बारे में जानकारी हासिल करता है, जिसको आसानी से पहचाना नहीं जा सकता। इसके उलट कम्प्यूटर वायरस सेल्फ रेप्लीकेशन की क्षमता रखता है और डिवाइस व डाटा को संक्रमित करता है। ऐसे में स्पाइवेयर वायरस से अधिक खतरनाक है।

क्या करें यूजर्स
- थर्ड पार्टी एप से कोई भी एप्लीकेशन डाउनलोड/अपडेट नहीं करें।
- मोबाइल संक्रमित होने का पता चलने पर उसे सेफ मोड पर ऑपरेट करें।
- टेलीग्राम सहित अन्य एप पर कॉल लॉग/एसएमएस/कॉन्टेक्टे्स/कैमरा/ जैसी परमिशन बंद कर दें।
- केवल गूगल प्ले स्टोर द्वारा नोटिफिकेशन भेजने पर ही एप अपडेट करें।
- फेक प्ले स्टोर से बचें।
- किसी भी एप के अपडेट करते समय यदि वह कोई परमिशन मांगता है तो उसे अनइंस्टॉल कर दें।