
तालाब
जोधपुर। नया तालाब जो कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा का हिस्सा है उसकी वाटर बॉडी के हिस्से को छोटा किया जा रहा है। पर्यटन और गंदगी हटाने के लिए इस प्रोजेक्ट के अच्छे पहलू भी सामने आए हैं। लेकिन एक खतरा जो सबसे बड़ा है वह यह कि जलाशय के जिस हिस्से को पाटा जा रहा है वहां अवैध कब्जे न हो जाएं। इससे पहले भी शहर के प्राचीन जलाशयों के आस-पास अतिक्रमण की समस्या रही है।
क्या है नया तालाब प्रोजेक्ट
नागौरी गेट के समीप शहर के प्राचीन जलस्रोतों में से एक नया तालाब पिछले कई वर्षों से दुर्दशा का शिकार है। जहां गंदगी और सीवरेज का पानी मिलने से परेशानी होती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा में इसे शामिल किया और इसके बाद जेडीए को इस पर काम शुरू किया। करीब ७ करोड़ की राशि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए चिह्लित की गई है। इसमें उद्यान के साथ जॉगिंग ट्रेक और बच्चों के लिए झूले भी लगेंगे।
वाटर बॉडी का एक तिहाई हिस्सा ही रहेगा
नया तालाब जिस स्वरूप में सालों से उसका एक तिहाई ही विकास के बाद रह जाएगा। दो तिहाई हिस्से को मलबा डाल कर समतल किया जाएगा। इसके बाद ही उस समतल स्थान पर उद्यान व अन्य विकास कार्य होंगे। फिलहाल जेडीए यहां समतलीकरण का कार्य कर रहा है।
दो और तालाब भी इसके बाद सूची में
परकोटा शहर में इसी तरह मौजूद दो और तालाबों पर विकास कार्य प्रस्तावित है। बाइजी तालाब पर स्टेप वेल और हाट बाजार के साथ नगर निगम विकास करवाने की योजना बना रहा है तो वहीं गंगलाव तालाब पर भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई है, वहां भी चार दीवारी निर्माण के बाद इसी तरह जलाशय के हिस्से को छोटा कर उद्यान व अन्य विकास करवाने की योजना है।
जलाशय का उपयोग नहीं इसलिए सिकुड़ रहा
सरकारी दावों के अनुसार इस जलाशय का अस्तित्व नहीं है और पानी का कोई उपयोग नहीं। इसलिए इसके स्वरूप को छोटा किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर सरकारें जल संरक्षण के दावे करती हैं। न्यायालय ने अपने निर्णयों में भी जलाशयों का स्वरूप नहीं छेडऩे के निर्देश दिए थे।
पत्रिका सवाल : वाटर बॉडी के हिस्से पर मलबा डाल कर उसको पाटना वैधानिक नहीं। इस पर फिलहाल तो उद्यान व अन्य सुविधाएं विकसित तो हो जाएगी, लेकिन इसके बाद किस प्रकार इस जमीन को कब्ज से मुक्त रख सकेंगे यह बड़ा सवाल है?
इनका कहना...
मलबा डलवाने का काम किया जा रहा है। समतल होने के बाद यहां उद्यान व अन्य कार्य करवाए जाएंगे। वाटर बॉडी एक तिहाई रहेगी, क्योंकि यह किसी काम नहीं आ रहा था।
- सुखराम चौधरी, अधीक्षण अभियंता, जेडीए जोधपुर।
Published on:
01 Feb 2021 07:12 pm
