
केरल के कोझीकोड में खतरनाक निपाह वायरस की चपेट में आने से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई है। 25 लोगों के खून में निपाह वायरस होने की पुष्टि हो गई है। केरल सरकार ने केंद्र सरकार से इस वायरस से निपटने के लिए मदद मांगी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, निपाह वायरस चमगादड़ से फलों में और फलों से इंसानों व जानवरों में फैलता है। निपाह के अलावा दुनिया में कई ऐसे खतरनाक वायरसों के बारे में, जिसने भारत समेत दुनियाभर में कई लोगों की जानें ली है...Next slide
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर। प्रदेश में निपाह वायरस का कोई खतरा नहीं है। न तो यहां की चमगादड़ वायरस से संक्रमित है और ना ही केरल से वायरस यहां आ सकता है। जोधपुर में चमगादड़ की 13 प्रजातियां हैं जिसमें से तीन फल खाने वाली प्रजाति हैं। फल खाने वाली चमगादड़ आकार में बड़ी होने से ये केवल 5 से 10 किलोमीटर क्षेत्र में ही उड़ सकती हैं।
रेलवे के डीआरएम बंगला के आसपास और मण्डोर उद्यान में फल खाने वाली टेरोपस प्रजाति (केरल की संक्रमित प्रजाति) जरूर मिलती है लेकिन उसमें निपाह वायरस नहीं है। गुरुवार को सरदारपुरा में घर के बाहर मिली चमगादड़ की प्रजाति राइनोपोवा सिनेरी कीड़े खाती है।
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग ने चमगादड़ों पर लम्बा शोध किया है। विवि के प्रोफेसर्स का कहना है कि भारत में चमगादड़ की 1100 और राजस्थान में 140 प्रजातियां पाई जाती हैं। प्रदेश की सभी चमगादड़ वायरस मुक्त है।
किसान तो ढूंढते हैं, मिलती है खाद
निपाह वायरस केरल में फिलहाल फल खाने वाली प्रजाति में है। जोधपुर में कीड़े खाने वाली 10 प्रजाति और 3 फल खाने वाली प्रजाति टेरोपस, रोजेप्टस और सिनेप्टरी है। जोधपुर में टेरोपस प्रजाति अधिक है। यह वही प्रजाति है जो केरल में संक्रमित है। टेरोपस केवल केला ही नहीं, सभी तरह के मौसमी फल खाती है।
चमगादड़ के मल-मूत्र में सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम प्रचूर मात्रा में होता है। किसान नेता दाऊलाल बूब बताते है, चमगादड़ की खाद बड़ी उपयोगी है। हम पुरानी हवेलियों और पोलों में चमगादड़ ढूंढते हैं। तेज लाइट व तालियां बजाकर उसे भगा देते हैं और उसका मल-मूत्र इकट्ठा कर खाद में काम लेते हैं।
चमगादड़ से कोई खतरा नहीं
रेलवे डीआरएम बंगला के आसपास और मण्डोर में टेरोपस प्रजाति है लेकिन वह संक्रमित नहीं है। यह केवल 5-10 किमी तक उड़ सकती है। सरदारपुरा में घर के बाहर मिली प्रजाति तो कीड़े खाती है। अगर 100 वाट का बल्ब लगाओ या हल्का म्यूजिक बजाओ तो भी चमगादड़ भाग जाएगी।
डॉ. हीराराम, असिस्टेंट प्रोफेसर, प्राणी शास्त्र विभाग, जेएनवीयू
(डॉ. हीराराम चमगादड़ों पर शोध कर चुके हैं)
वायरस केवल केरल में ही
निपाह वायरस अभी केरल से बाहर नहीं गया है। एेसे में जोधपुर में चमगादड़ भले ही हो लेकिन खतरा नहीं है। वैसे भी केरल तटीय इलाका है और उसकी जलवायु राजस्थान से भिन्न है।
डॉ. विनोद जोशी, निदेशक, वायरोलॉजी, अमेठी यूनिवर्सिटी दिल्ली
Updated on:
02 Jun 2018 08:07 am
Published on:
02 Jun 2018 07:57 am
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