
राजस्थान में पिछले 3 साल में नहीं लग पाया है कोई नया विंड एनर्जी प्लांट, नई नीति भी नहीं की जा रही लागू
अविनाश केवलिया/जोधपुर. पारंपरिक बिजली उत्पादन के विकल्प के तौर पर पूरा विश्व रिन्यूएबल एनर्जी की ओर देख रहा है। लेकिन इसके उलट प्रदेश में इसके सबसे महत्वपूर्ण और पुराने हिस्से विंड एनर्जी को दरकिनार कर दिया गया है। सरकार की उदासीनता ऐसी है कि प्रदेश में पिछले 3 साल में नया विंड एनर्जी का प्लांट नहीं लगा है।
पश्चिमी राजस्थान समेत पूरे प्रदेश में अप्रैल से लेकर आगामी पांच छह माह तक विंड स्पीड अच्छी रहती है। जो कि विंड एनर्जी के उत्पादन के लिए सबसे जरूरी है। पश्चिमी विक्षोभ की हवाएं भी विंड के जरिए बिजली उत्पादन में सहायक होती है। पिछले दो दशक में विंड एनर्जी ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। इन सबके बावजूद सरकार ने अब विंड एनर्जी को गंभीरता से लेना बंद कर दिया है। पिछले 3 साल में विंड एनर्जी का कोई भी नया प्लांट नहीं लगना इसी बात की ओर इशारा करता है।
फैक्ट फाइल
- 4292 मेगावाट के विंड प्लांट लगे हैं प्रदेश में
- 250 लाख यूनिट से ज्यादा औसत बिजली जनरेशन हो रहा है अभी
- 3 साल से नहीं लगा रहे नए विंड एनर्जी प्लांट
पीपीए भी नही रिन्यू
विंड प्लांट से बनने वाली बिजली के विक्रय के लिए संबंधित डिस्कॉम के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया जाता है। मार्च 2019 में ये पीपीए भी पूरे हो गए। इसके बाद बोली आधार पर बिजली खरीद प्रक्रिया को अपनाने का प्रयास किया गया। लेकिन मामला हाईकोर्ट में जा चुका है।
5 साल बाद बनी पॉलिसी भी नहीं आई धरातल पर
रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पांच साल तक कुछ खास नहीं कर पाई। वर्ष 2014 के बाद दिसंबर 2019 में सोलर और विंड-हाइब्रिड एनर्जी की नीतियां जारी की। लेकिन अभी विंड एनर्जी नीति को लेकर धरातल पर कोई काम शुरू नही हो पाया है।
इनका कहना है...
विंड के नए प्लांट लगवाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी ने रुचि नहीं दिखाई है। पीपीए रिन्यू का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, वहां से निर्णय हो पाएगा।
- अनिल गुप्ता, प्रबंध निदेशक, राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड
Updated on:
10 Jun 2020 10:43 am
Published on:
10 Jun 2020 10:43 am
