
old age home jodhpur
जोधपुर . उफ कभी उनकी खंासी, कभी उनका चश्मा, कभी उपदेश तो कभी उनकी सेवा चाकरी और देखभाल हम से नहीं होती। यह शहर के बुजुर्गों का हाल, जो अब बेहाल होने लगे हैं। एकल परिवारों के चलन और पश्चिम की हवा के सबब वे अब मम्मी पापा से पीछा छुडाऩे लगे हैं। जमाने की हवा ने आजकल के बेटों और बहुओं को निष्ठुर और निर्मोही बना दिया है। उनकी संवेदनाएं मर रही हैं। शहर के कुछ पुत्र और पुत्र वधुएं बुजुर्गोंं को बोझ समझ रहे हैं।
राजस्थान पत्रिका ने जोधपुर की स्वयंसेवी संस्था की ओर से संचालित अनुबंध संचालित ओल्ड एज होम 'अनुबंध वृद्धजन कुटीरÓ में रह रहे कुछ बुजुर्गों को उनकी संतान ने घर से निकाल कर वृद्धाश्रम पहुंचा दिया। कुटीर की संचालिका अनुराधा आडवानी ने चार बुजुर्गों के सच्चे किस्से बताए, जो आज यहां रह रहे हैं।
१.काश आज पापा होते
मां के आधे शरीर में लकवा है। पिता कैंसर से चल बसे। जाते हुए पत्नी से कहा,बैंक में ७-८ लाख रुपए तुम्हारे नाम हैं, अपने पास रखना...। दो महीने बाद बेटी ने कहा, बेटा बड़ा हो गया है, ससुराल में दो कमरे बनवाना है, कन्स्ट्रक्शन चल रहा है, पैसे कम पड़ रहे हैं, क्या करूं? काश आज पापा होते। मां ने कहा, तू चिंता क्यंू करती है मैं हूं ना कितने पैसेे लगेंेगे? बेटी ने कहा, करीब तीन- साढ़े तीन लाख। मां ने चेक काट कर रुपए दे दिया। बेटी ने कहा, जल्द लौटा दूंगी।
बेटे को सूचना मिली..चिंता जागी..। शाम को ऑफिस से आने पर बेटा मां को मंदिर ले गया मोटरसाइकिल पर..। दो तीन रोज मंदिर के दर्शन। एक शाम मां के पैर दबाते हुए बोला-आपको मोटरसाइकिल पर बहुत तकलीफ होती है ..सोचता हूं, गाड़ी खरीद लूं, पर इतने पैसे नहीं हैं। क्या करूं...काश! पापा होते। मां ने कहा, पापा नहीं हैं तो क्या? मैं हूं कितने पैसे चाहिए? कहा,तीन-साढ़े तीन लाख। मां ने चेक काट कर दे दिया। गाड़ी चार-पांच दिन बाद घर र्र्में, पर मां घर से बाहर अनुबंध वृद्धजन कुटीर में आ गई।
२.खाली हाथ
बुजुर्ग बाबूजी देख नहीं सकते। एक दिन बेटे ने अनुबंध मे आ कर कहा-बाऊ जी ये आपके पोते की बहू है, आशीर्वाद दो। बाऊ जी बोले-बहू? बेटा बोला-एक रिसैप्शन जोधपुर में किया है, सभी आए थे, दो दिन रुके थे, उनके नाम गिनाए। उन्होंने पूछा, बड़ा बेटा मंझला बेटा, छोटा बेटा बेटी दामाद दिल्ली वाले, सब आए थे? बेटा बोला- क्या पापा क्या बार पूछ रहे हो? बताया न सब आए थे। बाऊ जी के मन में कोहराम मचा। सोचते रहे कि सब आए, उनसे मिलने कोई नहीं आया। पांच मिनट सन्नाटा। बोले-बहू आई है, मेरे पास तो कुछ नहीं है। न देख सकता हंू, न दे सकता हूं। जोर से बोले-मैडम जी (अनुराधा आडवाणी) यहां हैं क्या? मैंने कहा -हां मैंने पांच सौ रुपए देते हुए कहा-बहू को दे दो। बेटा बोला-इनसे लेने की क्या जरूरत है, मैं देता हूं। थोड़ी देर में वो चले गए। बुजुर्ग मायूस उदास। उस रात बाबूजी और मैं सो नहीं पाए।
३.मुझे मां से मिलना है
लंच के बाद का समय था। एक बेटे ने अनुबंध आ कर कहा- मां से मिलना है। उसकी मां को पेरेलिसिस था। अनुमति दे दी। बेटा पहुंचा- ३ नंबर कमरा, चार महिलाएं सो रही थीं। तीन सो गई थीं। एक उनींदी झपकी ले रही थी। बेटे ने देखा, मां नींद में थी। उसने मम्मी के हाथ पर हाथ रखा, पेरेलिसिस के शरीर में हरकत नहीं हुई। उसने मां के हाथ में पहनी सोने की चार चूडि़यों पर हाथ कसा। झुरझुरी और कमजोर हड्डियों वाले हाथ पर जोर लगाया, एक चूड़ी हड्डी पर फंस गई। चुभन तेज हुई मां ने देखा, बेटा खड़ा है। उसने कलाई से एक चूड़ी खींची। मां के हाथ में खून से भरी फोफली चमड़ी। जल्दी से उठा, चूड़ी जीन्स की पेंट में ठूंसी और बाइक स्टार्ट कर फुर्र हो गया। पास में लेटी महिला चिल्ला उठी-चूड़ी ले गया,चूड़ी ले गया। मुझे बताया तो डॉक्टर को बुलाया, उन्होंने मरहम पट्टी की। मैं सोचने लगी, हाथ में तीन और चूडि़यां हैं, बेटा शायद तीन बार और मिलने आएगा।
४. कैसे मर गई?
एक अति संपन्न ९ पोते पोतियों वाली दादी। अनुबंध में पहुंची। सबने ध्यान रखा। कुछ अरसा बाद बुजुर्ग महिला बीमार हो गई। घर संदेश भिजवाया। कोई नहंी आया। जवाब मिला-हम तो ठीकठाक छोड़ गए थे बीमार कैसे हो गई? आपने सेवा का बीड़ा उठाया है, आप संभालो। पहले वहीं और बाद में अस्पताल में इलाज चला। हालत बहुत बिगड़ी तो घर वालों को फिर फोन किया। इस बार गुस्से में तुनक कर जवाब दिया- तो क्या करूं? देखिए मैं कंपनी में जनरल मैनेजर हूं। मेरे पास बहुत काम हैं। बहुत बड़े स्टाफ को हैंडल करता हूं। मेरे पास टाइम नहीं है। आइंदा डिस्टर्ब किया तो मैं देख लूंगा। मेरी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सरकार में ऊपर तक पहुंच है। आपका सेवा का यह सारा नाटक बंद करवा दूंगा। उसकी ऊ पर तक पहुंच का तो पता नहीं चला। हां उसकी मां जरूर ऊपर पहुंच गई। घर संदेश भिजवाया तो कहा, कैसे मर गई?
Updated on:
29 Oct 2024 12:53 pm
Published on:
02 Oct 2017 05:34 pm
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