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होली 28 को, होलिका दहन प्रदोषवेला में करना श्रेष्ठ

  भद्रा नहीं होगी बाधक, सदियों बाद सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग
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होली 28 को, होलिका दहन प्रदोषवेला में करना श्रेष्ठ

होली 28 को, होलिका दहन प्रदोषवेला में करना श्रेष्ठ

जोधपुर. आपसी रिश्तों में प्रेम सद्भाव का संदेशवाहक रंगों का दो दिवसीय त्योहार 28 मार्च से मनाया जाएगा। होली के दिन भद्रा दोपहर 1.54 बजे तक ही होने से इस बार होलिका दहन में भद्रा बाधक नहीं होगी। शास्त्रों में भद्रा के दरम्यान होलिका दहन वर्जित माना गया है।

पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि जोधपुर में प्रदोषकाल 28 मार्च को शाम 6.49 से प्रारंभ हो जाएगा। होलिका दहन शाम 6.49 से रात्रि 9.10 बजे तक शुभ और अमृत चौघडि़ए में करना श्रेष्ठ है। होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित होने की परम्परा के चलते इस बार प्रदोषवेला से ही होलिका दहन करना उत्तम माना गया है। होली पर बरसों बाद सर्वार्थसिद्धि योग और अमृतसिद्धि योग भी बना है।

सदियों बाद ऐसा योग

इस बार होली पर 500 सालों के बाद होली पर दो बहुत ही खास संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार होली पर चंद्रमा कन्या राशि में गोचर करेगा। इसके अलावा मकर राशि में गुरु और शनि विराजमान होंगे। शुक्र और सूर्य मीन राशि में रहेंगे। मंगल और राहु वृषभ राशि, बुध कुंभ राशि और मोक्ष के कारण केतु वृश्चिक राशि में होंगे। ग्रहों की ऐसी स्थिति के कारण ही इसे ध्रुव योग कहा जा रहा है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इस तरह से ग्रहों का योग 3 मार्च, सन् 1521 को बना था। इसके अलावा होली पर सर्वार्थसिद्धि योग और अमृतसिद्धि योग भी रहने वाला है।

होलिका दहन मुहूर्त

28 मार्च - शाम 6.49 से 9.10 बजे तक
कुल अवधि - लगभग 2 घंटे 21 मिनट