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एक साल की मासूम को जानलेवा बीमारी, इलाज को चाहिए भामाशाहों की मदद
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एक साल की मासूम को जानलेवा बीमारी, इलाज को चाहिए भामाशाहों की मदद

-ल्यूकेमिया बीमारी से है ग्रस्त, बोनमेरो ट्रांसप्लांट से बचेगी जिन्दगी
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जोधपुर.

महज एक साल की यह मासूम जन्म के कुछ माह तक स्वस्थ रही, लेकिन बादमें बच्ची को ल्यूकेमिया रूपी गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया। इलाज के इंतजार में जोधपुर की इस मासूम की जान खतरे में है। चिकित्सकों के अनुसार बोनमेरो ट्रांसप्लांट से ही बच्ची की जान बचाई जा सकती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बच्ची के परिवारजन इलाज खर्च की राशि का इंतजाम नहीं कर पा रहे। जिन्दगी से संघर्ष कर रही मासूम को दानदाताओं व भामाशाहों के सहयोग की दरकार है। समृद्धि को ल्यूकेमिया की बीमारी दिनों-दिन कमजोर कर रही है। श्वेत रक्त कणिकाओं के बढ़ जाने से ल्यूकेमिया बीमारी भयानक होती जा रही है। समृद्धि की आंख पर खतरा आ चुका है। आंख की पलक नष्ट हो चुकी है। इन दिनों यह मासूम तकलीफ व दर्द बढ़ जाने से असहनीय पीड़ा झेल रही है।

शहर के प्रतापगनर क्षेत्र निवासी विक्रम सांचोरा ड्राइवर के रूप में वाहन चलाते हुए घर-परिवार का गुजर बसर कर रहा है। उसकी दो संतान हैं, जिसमें एक बेटा युवराज (4), दूसरी पुत्री समृद्धि है, जो एक साल की है। जन्म के समय समृद्धि स्वस्थ रही। लेकिन कुछ माह बाद समृद्धि को ल्यूकेमिया ने जकड़ लिया। विक्रम व उसके परिवारजन अपनी लाडो के इलाज के लिए जोधपुर शहर के सभी अस्पतालों में परामर्श व इलाज ले चुके हैं। चिकित्सकों के अनुसार ल्यूकेमिया बीमारी के इलाज के लिए बोनमेरो ट्रांसप्लांट करना जरूरी है।

भाई बनेगा बोनमेरो डोनर

मासूम समृद्धि के पिता विक्रम सांचोरा ने बताया कि उसकी पत्नी योगिता को थाइराइड की समस्या है। उनकी दूसरी संतान समृद्धि को ल्यूकेमिया हो गया। पहली संतान पुत्र युवराज स्वस्थ है। जांच में युवराज का बोनमेरो ही समृद्धि के मैच हुआ है। इसलिए युवराज का बोनमेरो ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने भी हायर सेन्टर पर ले जाने का कह हाथ खड़े कर दिए हैं।

अब एसएमएस जयपुर ले जाकर समृद्धि का बोनमेरो ट्रांसप्लांट कराया जाएगा। युवराज के बोनमेरो समृद्धि को ट्रांसप्लांट कराने में करीब 20 लाख का खर्च आएगा, लेकिन इतनी राशि हमारे पास नहीं हैं। अब तक के इलाज में भी बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है और यदि राशि का इंतजाम नहीं हुआ तो समृद्धि को बचाना मुश्किल हो जाएगा। नन्हीं जान की तकलीफ देखकर मां योगिता व पिता विक्रम का बुरा हाल हो रहा है। पत्रिका के समक्ष पीड़ा बताते हुए मां योगिता व मौसी अनिता भारती के आंखों से आंसू छलक पड़े।