
चन्द्रयान-एक का शेष 20 फीसदी कार्य पूरा करेगा ऑर्बिटर, इसरो चंद्रयान के कैमरे के जरिए रोवर की जानेगा स्थिति
जोधपुर. चंद्रयान-1 ने चंद्रमा की 80 फीसदी मैपिंग की थी। अब बची हुई 20 फीसदी मैपिंग चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर करेगा। पूर्व में चंद्रयान-1 से बनाए गए मैप में कई खाली जगह रह गई थी, जिसे चंद्रयान-2 भर देगा। अभी चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर चंद्रयान-2 का मुख्य भाग ऑर्बिटर चक्कर लगा रहा है। फर्क सिर्फ इतना ही है कि अगर रोवर ढंग से चंद्रमा की सतह पर उतर जाता तो लैंडर के जरिए दक्षिणी धु्रव की विस्तृत स्टडी हो सकती थी, लेकिन ऑर्बिटर के जरिए चंद्रमा की स्टडी जारी रहेगी।
दो घंटे में चन्द्रमा का एक चक्कर
ऑर्बिटर 2 घंटे में चंद्रमा का एक चक्कर लगाता है,जिसमें 8 उपकरण लगे हुए हैं। इसमेंइंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर, दो एक्स रे मॉनिटर, हाई-रेजोल्यूशन कैमरा, सिंथेटिक एपर्चर राडार, टैरेन मैपिंग कैमरा और एज उपकरण है। चंद्रयान-1 में एक बैंड का सिंथेटिक एपर्चर राडार था। इस बार 2 बैंड का भेजा है। साथ ही केमिकल एनालिसिस के लिए दो एक्सरे मॉनिटर है। चंद्रमा के वातावरण के इलेक्ट्रॉन और आयन की जांच के लिए एज उपकरण है। अगर कुछ संभावना बनती है तो ऑर्बिटर के जरिए रोवर को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की जाएगी, लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है।
ऑर्बिटर के जरिए रोवर को चंद्रमा की सतह पर उतारना बहुत मुश्किल काम था इसलिए अंतिम समय को ‘15 मिनट ऑफ टेरर’कहते हैं। 13 मिनट तक तो सब कुछ ठीक-ठाक था लेकिन अंतिम के डेढ़ दो मिनट पहले संपर्क खत्म हो गया। हाल ही में इजराइल का रोवर भी इसी तरह की लैंडिंग में क्रेश हो गया था। चंद्रमा पर लैंडिंग केवल 30 फीसदी तक की सफल रही है क्योंकि एक लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही चीज की गति 1 मीटर तक करना बड़ा मुश्किल काम है।
(जैसा चंद्रयान-2 की रिव्यू कमेटी में शामिल जोधपुर निवासी डॉ नरेंद्र भंडारी ने संवाददाता गजेंद्र सिंह दहिया को अमरीका के कैलिफोर्निया से टेलीफोन पर बताया।)
Updated on:
08 Sept 2019 04:07 pm
Published on:
08 Sept 2019 04:07 pm
