
लवेरा बावड़ी। संत कबीरदास को दोहा बड़ा भया तो क्या भया जैसे पेड खजूर,पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर वाली बात अब नहीं रही हैं। कृषि विभाग में हुई उन्नति ने ये सब बदल दिए हैं। अब खजूर के फल दूर ऊंचाई पर होना बीते जमाने की बात हो गई है।
जसनाथ आसन्न पांचला सिद्धा के महंत योगेश्वर सूरजनाथ महाराज ने उजलिया भाकर के पीछे सिंधियों की ढाणी में अपने फार्म हाउस में खजूर के ऐसे पौधे लगाए हैं जो पूर्णतया जैविक आधारित हैं। जमीन से महज कुछ ही दूर खजूर के फल लगे हुए हैं। 2008-09 में पथरीली जमीन को चीर कर उपजाऊ योग्य बनाते हुए 2012 में करीब 624 खजूर के पौधे लगाए। जिसमें से करीब 400 पौधे फल दे रहे हैं।
खजूर की किस्मों में वरही, धनावी, मेडज्यूल व खूनजी हैं। सिद्धाज आर्गेनियस फार्म हाउस में महंत सूरजनाथ महाराज आमजन को अध्यात्म, योग के साथ ही जैविक खेती के बारे में प्रोत्साहित करते हैं। सही तरह से फल पक जाए तो एक पेड़ से करीब एक से दो क्विंटल तक फल देते हैं। पौधों को पानी देने के लिए डीप सिस्टम लगा हुआ हैं। फार्म पर अनार, निम्बू, बेर के पौधे भी लगाए हुए हैं। खास बात यह है की पौधे पर खजूर 30-40 फीट ऊपर नहीं महज दो या तीन फीट ऊपर ही रहते हैं। खजूर की मिठास ही इसकी पहचान है।
Published on:
31 Jul 2023 04:21 pm
