
conditions of Pak Visthapit, india pakistan news, jodhpur news, jodhpur news in hindi, pak visthapit, pak visthapit in jodhpur
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. पाकिस्तान में शिक्षा के नाम पर भेदभाव होता था और धर्म के नाम पर उत्पीडऩ। इस कारण वे खुद और उनके बच्चे स्कूल नहीं जा सके। अब भारत में आकर आस जगी है कि उनके बच्चे तालीम लेकर अपना भविष्य संवार सकेंगे। यह कहानी है पाकिस्तान से सताए गए हिन्दू परिवारों की, जो अब रोजगार व सुकून की तलाश में जोधपुर आकर बस गए हैं। पाकिस्तान में भुखमरी और भेदभाव से परेशान होकर आए पाक विस्थापित यहां के माहौल में ढलने लगे हैं। उनके नाती-पोते यहां शिक्षा ले रहे हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग भी आंगणवा, गंगाणा व काली बेरी आदि पाक विस्थापित बस्तियों में स्कूल छोड़ चुके व स्कूल जाने योग्य बच्चों का सर्वे कर रहा है।
पाकिस्तान में पढ़ाया जाता था कलमा
पंजाब (पाकिस्तान) के बहावलपुर से चार साल पहले कालीबेरी में आकर बसे अर्जुनराम बताते हैं कि वहां शिक्षा का माहौल नहीं था। स्कूलों में कलमा पढ़ाया जाता है। हिन्दू परिवार तालीम लेने में आगे नहीं रह पाते हैं। हालांकि उनके बच्चों ने थोड़ी-बहुत पढ़ाई की, लेकिन वे अपने पोते-पोतियों का जोधपुर के स्कूल में दाखिला करवाएंगे। 28 वर्षीय पूरण का कहना है कि वे एक साल के थे, तब परिवार सहित यहां आ गए। उनके बाप-दादा ने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा। पूरण अपनी सात वर्षीय बेटी का पहली बार स्कूल में दाखिला करवाएंगे। बस्ती में मनीषा व रेखा सहित कई बच्चियां अब शिक्षा से जुड़ेंगी।
बस्ती में 95 प्रतिशत अभिभावक अनपढ़
गोविंद ने बताया कि कालीबेरी बस्ती में आकर बसे 95 प्रतिशत अभिभावक निरक्षर हैं। वे अपने बच्चों को पढ़ाना-लिखाना शुरू कर रहे हैं। पांच प्रतिशत अभिभावक राजकीय प्राथमिक स्कूल पाक विस्थापित भील बस्ती अंबेडकर नगर में बच्चों को भेजते हैं। स्कूल में एक ही शिक्षिका के भरोसे करीब डेढ़ बच्चे हैं। सीमांत लोक संगठन की ओर से 2003 में मीरा संस्थान की ओर से प्राथमिक स्कूल शुरू किया गया। इसके बाद इमारत बनी और सरकारी स्कूल शुरू हुआ।
इनका कहना है
पाकिस्तान में थे बंधुआ मजदूर शिक्षा के सामान्य प्रोग्राम में ये बच्चे शामिल नहीं हो रहे हैं। एक विशेष कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए। आंगणवा जैसे इलाकों में स्कूल तक नहीं है। पाकिस्तान में ये लोग बंधुआ मजदूरों की तरह रहते थे। हिन्दूसिंह सोढ़ा, अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन बच्चों को जोडऩे का कार्य जारी प्रवेशोत्सव के प्रथम चरण से सर्वे चल रहा है। द्वितीय चरण में भी कार्य जारी रहेगा। घर-घर सर्वे किया जा रहा है, ताकि पाक विस्थापित बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा सके।
धर्मेन्द्रकुमार जोशी, डीईओ प्रारंभिक प्रथम
Published on:
17 Jun 2018 11:50 am
