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फिर मानवता हुई शर्मसार, दो दिन की नवजात को आईसीयू में भर्ती कराकर परिजन हुए गायब

एफआईआर दर्ज, प्रारम्भिक जांच मां-पिता के नाम-पते गलत निकले
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जोधपुर. दो दिन की प्री मैच्योर बेबी के बीमार होने पर इलाज के लिए उम्मेद अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराने के बाद एक-एक करके परिजन गायब हो गए। एक दिन तक इंतजार करने के बाद अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी ने खाण्डा फलसा थाना पुलिस की मदद ली और भर्ती चि_ी में दर्ज नाम-पते के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की प्रारम्भिक जांच में मां व पिता के नाम-पते गलत निकले। उप निरीक्षक पुखाराम के अनुसार गत आठ अगस्त की सुबह चार बजे तीन-चार व्यक्ति एक नवजात बच्ची को तबीयत ठीक नहीं होने पर अस्पताल लेकर आए। जो सात माह की प्री मैच्योर थी और एक दिन पहले ही किसी अन्य अस्पताल में उसका जन्म हुआ था।

बच्ची की मां साथ नहीं थी। जांच के बाद नवजात बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर लिया गया। भर्ती चि_ी में मां का नाम गीता पत्नी दशरथ और जोधपुर में नेवरा कल्ला नाम लिखाया गया। आठ अगस्त को दिन व रात भर उसका इलाज कराया गया। साथ ही आने वाले वार्ड के बाहर मौजूद थे। फिर दूसरे दिन नौ अगस्त की सुबह बच्ची के साथ आने वाले परिजन एक-एक करके अस्पताल से निकल गए। काफी देर तक परिजन का इंतजार करने के बाद नर्सिंग स्टाफ ने अस्पताल व बाहर तलाश के प्रयास किए, लेकिन उनका कोई पता नहीं लगा।

एक दिन तक इंतजार करने के बाद शनिवार को अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. रंजना देसाई की तरफ से चिकित्सा अधिकारी डॉ कपिल राहेजा की शिकायत पर बतौर पिता दशरथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने नाम व पते के आधार पर नेवरा कला गांव में तलाश के प्रयास किए, लेकिन वहां इस नाम से कोई भी व्यक्ति नहीं मिला।

बाल गृह व दो नर्स के भरोसे नवजात बालिका


पुलिस का कहना है कि परिजन के गायब होने के बाद बच्ची की सार-संभाल के लिए मण्डोर स्थित बालकल्याण समिति की ओर से संचालित किशोर बाल गृह को सूचना दी गई, जहां से एक महिला केयर टेकर अस्पताल पहुंची और बच्ची की देख-भाल शुरू की। अस्पताल प्रशासन की तरफ से दो नर्स को भी लगाया गया है।

अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद


पुलिस ने बच्ची को छोड़कर जाने वालों का पता लगाने के लिए अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के प्रयास किए, लेकिन कैमरे बंद होने से पुलिस को निराशा हाथ लगी। पुलिस का कहना है कि कई बार अस्पताल प्रशासन को लिखित में अवगत कराने के बावजूद कैमरे बंद हैं।