
जोधपुर के अस्पताल की यह तस्वीरें सोचने पर मजबूर कर देगी
जोधपुर.
सरकारी अस्पताल में सुविधाएं तो सरकार व भामाशाहों ने पूरी दे रखी है। लेकिन इनको लेकर जिम्मेदार अपना कार्य त्वरित गति से नहीं करते। महात्मा गांधी अस्पताल की इमरजेंसी में हाथी राम ओडा से अपने मरीज को लेकर आए परिजन खुद ट्रोली खींच मरीज को अंदर लाए और फिर खुद ही बेड पर सुलाया। इस बीच नर्सिंग कर्मी, ट्रोली मैन या बाई दूर-दूर तक नजर नहीं आए। टीम ने मौके पर पड़ताल की तो इमरजेंसी में रेजिडेंट भी केवल मेडिसिन व सर्जरी के दिखे। ऑर्थोपेडिक रेजिडेंट का प्लास्टर रूम में पूछने पर भी मौजूद कर्मचारी ने ढंग से उनके मिलने तक का जवाब नहीं दिया। हालांकि टीम को रेजिडेंट पास के दूसरे कक्ष की तरफ दिखा, लेकिन पत्रिका टीम की पड़ताल तक रेजिडेंट सीट पर नहीं आया।
जांच नि:शुल्क तो फिर बिल की औपचारिकता क्यों
सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क जांच सुविधा है। वहीं बात करने पर एक परिजन ध्रुवनारायण ने कहा कि अस्पताल में जांच फ्री है, ऐसे में इमरजेंसी में मरीज के साथ एक ही परिजन को रखा जाता है। मरीज को अकेला छोड़ परिजन पहले बिल कटवाने जाता है और उसके बाद लैब में रक्त का सैंपल देता है। जांच निशुल्क है तो बिल कटवाने की औपचारिकताएं क्यों की जा रही है।
Updated on:
20 Jan 2020 09:26 pm
Published on:
20 Jan 2020 09:23 pm
