
देखने वाली है जोधपुर में पैट लवर्स की दीवानगी, कोई बना रहा डॉग कैनल, किसी ने स्ट्रीट डॉग्स को दी घर में जगह
अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. शहर में आजकल डॉग्स पालने को लेकर अलग क्रेज हैं। ज्यादातर जोधपुराइट्स जर्मन सेफर्ड, लेबरा डोर व पॉमिलियन डॉग पालने के ज्यादा शौकीन हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि शहर में एक डॉग लवर ऐसा भी है, जिसने डॉग्स के लिए अलग से कैनल (घर) बना रखा है। इस घर में अलग-अलग नस्ल के सभी डॉग हैं। ऐसा ही एक घर है चांदबावड़ी-सुगंध गली के ऊपर ब्रह्मपुरी की तंग गलियों में। वहीं जोधपुर में डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर डॉ. अजय मालवीय स्ट्रीट डॉग को लेकर अतिसंवेदनशील है। उन्होंने अपने अशोकनगर स्थित घर में ही स्ट्रीट डॉग के लिए पूरा गलियारा दे रखा है।
कुत्तों के लिए बनाया अलग से घर
भीतरी शहर निवासी गजेन्द्र जोशी ने डॉग्स के लिए ब्रह्मपुरी में अलग घर बना रखा है। इन कुत्तों को बाकायदा जोशी अपने बच्चों की तरह स्नेह करते हैं और उनके खान-पान पर प्रतिमाह हजारों रुपए खर्च करते हैं। गजेन्द्र जोशी बताते हैं कि रोडवेज में जॉब के दौरान शुरू से वे अपने घर में कुछ दिन के लिए विभिन्न ब्रीड्स के डॉग लाते थे, उसी समय से उनके पुत्र पंकज जोशी को डॉग का शौक लग गया। अब जोशी व उनके पुत्र में डॉग्स के प्रति दीवानगी देखते बनती हैं। उनके पास लेबरा डोर रिटीवर, गोल्डन रिटाइवर, गे्रट डेन, बिगल, जर्मन सेफर्ड, पग, स्मॉल ब्रिड समेत कई तरह डॉग हैं। इसके अलावा ग्रेट डेन के 11 बच्चे उनके पास है। जिनमें एक डॉग की लागत करीब डेढ़ लाख रुपए है। पहले फार्म हाउस में कुत्तों को रखते थे, लेकिन अब वे घर के नजदीक डॉग्स को अपने दूसरे घर में ले आए। अभी उनके पास विभिन्न प्रजातियों के 20 से ज्यादा डॉग्स हैं।
जीव दया हमारी संस्कृति का हिस्सा: डॉ. मालवीय
डॉक्टर अजय मालवीय वैसे तो सर्जन है, लेकिन उनकी संवेदनाएं मरीजों के साथ गली-मोहल्लों के कुत्तों के साथ भी है। मालवीय अपने अशोक नगर स्थित हाउस में डॉग के लिए एक पूरा गलियारा व पार्क यूज कर रहे हैं। बारिश की सीजन में वे इन्हें घर के अंदर तक ले आते हैं ताकि वे परेशान नहीं हो। प्रतिदिन डॉ. मालवीय दो से तीन किलो दूध व रोटियां कुत्तों को खिलाते हैं। डॉ. मालवीय ने बताया कि हमारी हिन्दू संस्कृति का एक हिस्सा जीवदया है, वे उसकी पालना कर रहे हैं।
Published on:
14 Nov 2019 11:55 am
