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फलोदी : जिला मुख्यालय से दूरी बनी अभिशाप, अपने दम पर बने सरताज

किसानों के विकास व उन्हें उन्नत तकनीक से जोडऩे के लिए विभिन्न योजनाएं चला रखी है, लेकिन फलोदी के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों को उन्नत बनाने की योजनाएं यहां विफल होती जा रही है। इसका सबसे बडा कारण उपखण्ड मुख्यालय की जिला मुख्यालय से लम्बी दूरी है।
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फलोदी :  जिला मुख्यालय से दूरी बनी अभिशाप, अपने दम पर बने सरताज

फलोदी : जिला मुख्यालय से दूरी बनी अभिशाप, अपने दम पर बने सरताज

फलोदी (जोधपुर) . किसानों के विकास व उन्हें उन्नत तकनीक से जोडऩे के लिए विभिन्न योजनाएं चला रखी है, लेकिन फलोदी के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों को उन्नत बनाने की योजनाएं यहां विफल होती जा रही है। इसका सबसे बडा कारण उपखण्ड मुख्यालय की जिला मुख्यालय से लम्बी दूरी है।

जोधपुर जिले के सबसे बड़े कृषि हब फलोदी के लिए जिला मुख्यालय से दूरी अभिशाप बन गया है। हालात यह है कि कृषि उत्पादन क्षेत्र में सरताज होने के बाद भी यहां के किसानों को उन्नत तकनीक का ज्ञान देने वाला कोई नहीं है, जिससे यहां के किसानों को कृषि जिन्सों में उम्मीद से कम मुनाफा मिल रहा है। यहां के किसानों ने अपनी मेहनत के दम पर अपने खेत खलिहान तैयार किए हैैं और जिले के सबसे बड़े अन्नदाता बनकर उभरे है।

इसलिए पिछड़ रहा फलोदी

चालीस फीसदी लोग खेती से जुड़े हैं और उनका घर व जीवन कृषि व पशुपालन पर ही निर्भर है। फलोदी सीमावर्ती उपखण्ड होने के साथ ही जिला मुख्यालय से फलोदी मुख्यालय करीब 130 किलोमीटर दूर है, जिस कारण से जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों को दो दिन का ट्यूर बनाकर निकलना पड़ता है, ऐसे में कई अधिकारी अपने मुख्यालय से बाहर नहीं निकलते हैं, जिससे यहां के किसानों तक सरकारी योजनाएं पहुंचने से पहले ही योजनाओं का टारगेट पूरा हो जाता है।


नहीं है योजनाओं की जानकारी

विशेषज्ञों के अनुसार यहां के किसान मेहनतकश और कम पढ़े-लिखे हंै और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के साधन भी कम है, ऐसे में यहां के किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी नहीं हो पाती है। डिजिटल जमाना होने के बाद भी किसानों को सरकारी योजनायों का लाभ नहीं मिल पा रहा।


बाहर से आकर खेती कर रहे किसान

फलोदी की जमीन उपजाऊ है, जिससे कईं किसान बाहर से आकर खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है। यहां की धरा की मिट्टी उपजाऊ होने से किसानों को लाभ मिल सकता है।


तो सोना उगलेगी धरती

यहां की मिट्टी उपजाऊ है, यहां के लोग भी मेहनतकश हैं, लेकिन उन्नत कृषि की जानकारी देने वाला कोई नहीं है। यदि फलोदी को कृषि उपनिदेशक कार्यालय की स्वीकृति मिले, तो यहां के किसान उन्नत खेती की नवीन तकनीक से जुड़ सकेंगे, जिससे ना केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि उन्हें उन्नत तकनीक के साथ अपनी जमीन की उर्वरकता भी बचाने में मदद मिलेगी।
- नरेश व्यास, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान संघ।


फैक्ट फाइल-

- 12 लाख बीघा से अधिक भू-भाग पर हर साल होती है खेती
- 5 लाख से अधिक लोग करते हैैंैं कृषि कार्य

- 20,000 से अधिक नलकूप खुदे हंै फलोदी क्षेत्र में
- 1 करोड़ क्विंटल से अधिक की पैदावार होती है हर साल फलोदी में

- प्याज की खेती का बड़ा हब है फलोदी का कृषि क्षेत्र।