
पीपाडसिटी : मंडी शुल्क में तीन वर्ष में पौने पांच करोड़ का घाटा
पीपाड़सिटी (जोधपुर). कृषि उपज मंडी समिति यार्ड में नैफेड की ओर से समर्थन मूल्य पर किसानों के मूंग खरीदे जा रहे हैं, लेकिन मंडी को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार के मंडी शुल्क हटा देने से इनकी हालत पतली हो रही है।
सूत्रों के अनुसार वर्षों से राजफैड राज्य सरकार के निर्देश पर किसानों से समर्थन मूल्य पर मूंग और रायड़ा समय-समय पर खरीदता रहा है। पहले इसके लिए मंडी को शुल्क के रूप में खरीद केंद्र होने से लाखों की आय होती थी। इससे मंडी बोर्ड किसानों की सुविधाएं विकसित करने में खर्च करता था।
इससे मंडी की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती थी। हर छोटे-बड़े कार्य के लिए मंडी बोर्ड अपने स्तर पर खर्च करता था। पूर्व में समर्थन मूल्य पर राजफैड की ओर से कुल खरीदे गए जींस की राशि के आधार पर मंडी को 1.60 रुपए प्रति सैंकड़ा की दर से दिए जाते थे।
बोर्ड पर सरकार का कब्जा
कृषि उपज मंडी समितियों के चुनाव नहीं करवाने से मंडी बोर्ड में प्रशासक नियक्त हैं। इस कारण किसानों की आवाज़ सरकार तक नहीं पहुंचने से मंडी आर्थिक रूप से कमजोर हो रही है।
मूंग खरीद में करोड़ो की चपत
पीपाड़सिटी कृषि मंडी के क्षेत्राधिकार में राजफैड ने भोपालगढ़ और पीपाड़सिटी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद के दो केंद्र खोल रखे हैं। जहां पर करोड़ों में मूंग खरीद की जा रही है।
एक अनुमान के अनुसार सन् 17-18 में 1 करोड़ 94 लाख 62 हजार 961 रुपए, सन् 18-19 में 1 करोड़ 43 लाख 9 हजार 965 रुपए, सन् 19-20 में अब तक 1 करोड़ 39 लाख 79 हजार 191 रुपए मंडी शुल्क बनता है। इसे गत सरकार ने समाप्त कर दिया, इस कारण मंडी को नहीं मिल सके। जबकि परिसर में गेट पास मंडी प्रशासन ही जारी करता है।
इन्होंने कहा
समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद में मंडी शुल्क राजफैड देता है, इसे समाप्त करने से मंडियों का आर्थिक विकास प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार को इसे पुन: शुरू करने के राजफैड को निर्देश देना चाहिए।
रामनिवास पूनिया, पूर्व अध्यक्ष कृषि उपज मंडी पीपाड़सिटी
भाजपा सरकार ने हमेशा मंडी चुनाव कराकर किसानों को सत्ता सौपी हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार चुनाव नहीं करवाकर किसान हितों पर कुठाराघात कर रही है।
कमसा मेघवाल, पूर्व राज्य मंत्री,भोपालगढ़
Published on:
30 Dec 2019 03:10 pm
