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खनन से पहले पेश करना होगा प्लान, कैसे करेंगे पर्यावरण का प्रबंधन ?

- खानधारकों पर बढ़ेगा भार, खुद ही बनानी होगी 'इएमपीÓ - इएमपी अनुमोदन के अभाव में प्रभावित होगा खनन- प्रदेशभर में लागू होगी व्यवस्था
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जोधपुर

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Amit Dave

Sep 29, 2019

खनन से पहले पेश करना होगा प्लान, कैसे करेंगे पर्यावरण का प्रबंधन ?

खनन से पहले पेश करना होगा प्लान, कैसे करेंगे पर्यावरण का प्रबंधन ?

जोधपुर।

आर्थिक मंदी के दौर में सरकार ने खानधारकों पर एक और बोझ डाल दिया है। प्रदेश के खनन पट्टाधारकों को अब खनन गतिविधियां शुरू करने से पहले प्रस्तुत किए जाने वाले एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान (इएमपी) व एनवायरमेंटल इम्पेक्ट एसेसमेंट (इआइए) क्लस्टर स्तर पर, प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट (परियोजना प्रस्तावक) या व्यक्तिगत स्तर पर बनाकर प्रस्तुत करनी होगी। इससे खानधारकों पर इएमपी व इआइए बनाने का अतिरिक्त खर्चा बढ़ेगा व उनको प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट के चक्कर भी लगाने होंगे। इएमपी अनुमोदन के अभाव में खनन कार्य भी प्रभावित होगा। दरअसल पूर्ववर्ती सरकार में खनन पट्टाधारकों द्वारा एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान (इएमपी) व एनवायरमेंटल इम्पेक्ट एसेसमेंट (इआइए) बनाने का खर्च डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से वहन करने के आदेश हुए थे। अब इएमपी व इआइए बनाने के लिए राशि खानधारक को ही देनी होगी, जबकि इस फंड में खानधारकों से वर्तमान में भी शुल्क वसूला जा रहा है।

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क्या होती है इएमपी

एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान (इएमपी) में, किसी भी खानाधारक द्वारा जिस क्षेत्र में खनन किया जाएगा, उस क्षेत्र में खनन से होने वाले दुष्प्रभावों व उनकेबचाव की जानकारी दी जाती है। जिसमें

- खनन क्षेत्र में वायु, ध्वनि, जल व मिट्टी प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभाव।

- खनन कार्य की मॉनिटरिंग।

- जनजीवन व पशु-पक्षियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा

- खानधारक की ओर से उक्त क्षेत्र में पौधारोपण व उनके संरक्षण की व्यवस्था क्या होगी।

- सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत योगदान।

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सभी खानों पर लागू होगी

पूर्व में छोटी खानों या क्वारी लाइसेंसों (1 हैक्टेयर से कम क्षेत्र में विकसित माइन्स) को इएमपी देने की आवश्कता नहीं रहती थी। वर्ष 2012-13 के बाद छोटी खानों के लिए भी इएमपी अनुमोदन अनिवार्य कर दिया गया। उस समय केवल बड़ी खानों या खनन पट्टों (4 हैक्टेयर व इससे ज्यादा क्षेत्र में विकसित माइन्स ) को ही इएमपी देनी पड़ती थी। अब सभी खानों को इएमपी देनी होगी।

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एक नजर

- करीब 6000 हजार क्वारी लाइसेंस (1 हैक्टेयर से कम क्षेत्र में विकसित माइन्स)

- करीब 125 खनन पट्टे (4 हैक्टेयर व इससे ज्यादा क्षेत्र में विकसित माइन्स )

- करीब 1500 स्टोन कटिंग इकाइयां।

- प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख टन का उत्पादन।

- करीब 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से मिल रहा रोजगार।

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मुख्यालय के आदेश है। नए आदेश के तहत खान मालिकों को इएमपी बनाकर अनुमोदन कराना होगा। इएमपी के अभाव में उनका खनन कार्य प्रभावित होगा व विभाग की ओर से कार्यवाही होगी।

श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिंग इंजीनियर

जोधपुर