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बदहाल बावड़ी के बदलेंगे दिन, पीएम मोदी की तारीफ के बाद सुध लेने पहुंचे मेयर

उपेक्षा का शिकार हो रही चांद बावड़ी की होगी अब मरम्मत, पीएम मोदी के तारीफ करने के बाद सुध लेने गए मेयर।

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जोधपुर

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Rajesh

May 01, 2018

Pm Modi mentioned chand baori mayor goes to take care of it

जोधपुर। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को अपने मन की बात कार्यक्रम में चांद बावड़ी की तारीफ की तारीफ करते हुए जल संरक्षण विषय पर अपने विचार व्यक्त किए थे। इसमें उन्होंने देश की जल परंपरा और यहां के प्राचीन जल संरक्षण से जुड़ी बावडिय़ों आदि स्रोतों का जिक्र किया है। भले ही वह चांद बावड़ी जोधपुर वाली थी या आभानेरी वाली, लेकिन पीएम मोदी के जिक्र करने के बाद जोधपुर की चांद बावड़ी के हालात सुधरने की कवायद शुरु हो गई है।आपको बता दें कि इन दिनों चांद बावड़ी उपेक्षा का शिकार हो रही है। इसमें शराब की बोतलें इत्यादि पड़ी रहने से कई भक्तों और ब्राह्मणों का मोह भंग हो रहा है। लेकिन पीएम मोदी के बावड़ी की जल मंदिर के रूप में तारीफ करने के बाद सोमवार को महापौर घनश्याम आेझा नगर निगम के अफसरों के साथ बावड़ी की सुध लेने पहुंचे।

मौके पर पहुंचे महापौर घनश्याम ओझा और निगम अधिकारी ने भीतरी शहर स्थित चांद बावड़ी का निरीक्षण किया। मेयर ने चांद बावड़ी की दुर्दशा पर नाराजगी जताई। गौरतलब है कि लोगों की आस्था की प्रतीक चांद बावड़ी की वर्तमान में हालत बहुत खराब है। क्षेत्र वासियों का कहना है कि इसमें सीवरेज का पानी भी आता है। इस पर महापौर ने दूषित पानी को तुरंत खाली करने आैर गंदे पानी की आवक रोकने के लिए आसपास की सीवरेज लाइनें तुरंत बंद करने के निर्देश दिए। साथ ही बावड़ी के पौराणिक स्वरुप को लौटाने व मरम्मत के लिए दस लाख रुपए स्वीकृत करने की भी घोषणा की। आपको बता दें कि मौके पर उनके साथ पार्षद लक्ष्मीनारायण सोलंकी, राकेश बागरेचा, उम्मेदसिंह, दिनेश बोहरा व सुनीलदत्त शर्मा, मुख्य अभियंता सुमनेश माथुर, एक्सईएन विनोद व्यास, सुधीर माथुर व मुख्य सफाई निरीक्षक अपूर्व कुमार पुरोहित भी थे।

आपको बता दें कि जोधपुर में अनेक जगह बावड़ियां हैं। जोधपुर जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र के संदर्भ में तो इनका महत्व और बढ़ जाता है, जहां वर्षा न्यूनतम होती है। इस जगह का पवित्र जल लोग जलाभिषेक के लिए भी काम में लिया करते थे और जहां तक पीएम नरेंद्र मोदी ने जल संग्रहण की बात की है तो यह बात जरूर है कि रानीसर-पदमसर ओवरफ्लो यानी ओटे के दौरान यानी यहां पानी जरूर इकठ्ठा होता है। लेकिन वह भी प्रशासन इकठ्ठा नहीं कर पाता है। कुल मिलाकर बावड़ी इतनी बड़ी नहीं है। हालांकि पीएम मोदी ने चांद बावड़ी को भारत की सबसे बड़ी, खूबसूरत और मशहूर बावड़ी में से एक बताया था (ये संभवत: आभानेरी चांद बावड़ी है)। उस धरती पर जहां पानी की किल्लत रहती है बावड़ी का होना एक खास बात है। खैर पीएम मोदी ने जिस भी चांद बावड़ी की तारीफ की हो लेकिन उनके मुंह से चांद बावड़ी का नाम सुनकर आखिरकार प्रशासन बावड़ी की सुध लेने के लिए और मरम्मत कराने के लिए जागरुक तो हुआ। अब यह उम्मीद करना भी गलत नहीं होगा कि चांद बावड़ी के साथ जोधपुर की बाकी बदहाल पड़ी बावड़ियों की भी मरम्मत हो सकती है। क्षेत्रवासियों के लिए यह भी किसी खुशखबरी से कम नहीं है।