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थानेदार ने मांगे थे छह लाख, 25 हजार कांस्टेबल को दिलाए, अब चार्जशीट पेश

एसीबी ने दो साल की जांच में आरोप सही माने, अदालत ने दोनों को जमानत पर छोड़ा
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जोधपुर. 61 लाख रुपए की धोखाधड़ी मामले में दस प्रतिशत के हिसाब से छह लाख रुपए बतौर रिश्वत मांगकर पच्चीस हजार रुपए कांस्टेबल को दिलाने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बालोतरा थाने के तत्कालीन उप निरीक्षक (थानेदार) और एक कांस्टेबल के खिलाफ मंगलवार को जोधपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण मामलात की अदालत में चालान पेश किया। बाइस माह की जांच में एसीबी ने दोनों के खिलाफ आरोप प्रमाणित माने।

अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत मुचलके पर रिहा किया।ब्यूरो के उप महानिरीक्षक सवाईसिंह गोदारा के अनुसार प्रकरण में बाड़मेर जिले में पुलिस स्टेशन बालोतरा के तत्कालीन उप निरीक्षक जगदीश सिहाग व कांस्टेबल रामाराम बिश्नोई के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया है। वर्तमान में एसआई जगदीश पुलिस लाइन जैसलमेर और कांस्टेबल रामाराम अभी तक बालोतरा थाने में ही पदस्थापित है।

दोनों आरोपियों को जमानत मुचलके पर छोड़ा
जांच अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपालसिंह भाटी ने बताया कि चालान पेश के दौरान दोनों आरोपियों को कोर्ट में मौजूद रहने के लिए सीआरपीसी की धारा 41 के तहत नोटिस दिया गया था। इस पर दोनों आरोपी कोर्ट में मौजूद रहे। दोनों ने अधिवक्ता के मार्फत जमानत आवेदन लगाया। तब दोनों को जमानत मुचलके पर छोड़ा गया।

संदेह होने पर थाने से बाहर निकल गया था एसआइ
बालोतरा निवासी व्यवसायी जितेन्द्र राठी ने वर्ष 2017 में बालोतरा थाने में चित्तौडगढ़़ के शम्भुपूरा में आदित्य सीमेंट वक्र्स के खिलाफ 61,13,040 रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। यह राशि बरामद करने की एवज में जांच अफसर जगदीश सिहाग ने छह लाख रुपए मांगे थे। राठी ने एसीबी में शिकायत कर दी। 25 जून 2017 को ब्यूरो ने सत्यापन के लिए राठी को रिकॉर्डर देकर बालोतरा थाने भेजा, जहां एसआइ ने पांच लाख रुपए लेने की सहमति जताई थी। उसने दो लाख रुपए अग्रिम मांगे थे। व्यवसायी 25 हजार रुपए देने लगा तो एसआई ने कांस्टेबल रामाराम को बुलाया और 25 हजार रुपए उसे दिलवा दिए थे।

दूसरे दिन वह 1.75 लाख रुपए देने थाने पहुंचा था, लेकिन संभवत: एसआइ को संदेह हो गया था। उसने रिश्वत नहीं ली और कुर्सी से उठकर बाहर आ गया था। फिर मोटरसाइकिल लेकर थाने से निकल गया था। वह रंगे हाथों पकड़ में नहीं आ सका, लेकिन सत्यापन में पांच लाख रुपए मांगने, इसमें से दो लाख अग्रिम और पच्चीस हजार रुपए कांस्टेबल को दिलाने की पुष्टि होने पर दोनों के खिलाफ एसीबी ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।