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हर पांच साल में बदल जाती है सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र के विकास की दिशा, यहां से लगातार जीतते रहे हैं गहलोत

वर्ष 1998 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद 1999 में तत्कालीन विधायक मानसिंह देवड़ा ने यह सीट गहलोत के लिए खाली की थी।

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. जिले का सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र। केवल यही एक सीट है जो जिले की 10 सीटों में से वर्तमान में कांग्रेस के खाते में है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यहां से विधायक हैं। वर्ष 1998 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद 1999 में तत्कालीन विधायक मानसिंह देवड़ा ने यह सीट गहलोत के लिए खाली की थी। इसके बाद से गहलोत यहां से लगातार जीत रहे हैं।


दोपहर का वक्त। विधानसभा क्षेत्र का व्यस्त इलाका पावटा चौराहा। यातायात का दबाव यहां हमेशा बना रहता है। यातायात नियंत्रण करने के लिए चौराहे के एक ओर अस्थाई बैरिकेडिंग लगा रखी है। चौराहे पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी कम और आवारा पशु ज्यादा नजर आते हैं। ट्रैफिक कंट्रोल करने के साथ इन पशुओं से निपटना किसी चुनौती से कम नहीं। समीप ही संभाग का रोडवेज का सबसे बड़ा बस स्टैंड। सालों पुराना परिसर, जो कि लगातार यात्री भार और बसों का दबाव झेल रहा है। संकरे परिसर में एक ही समय में 40 से अधिक बसें खड़ी थी। क्षमता 20-25 की ही है। रात के समय तो बसों को परिसर के बाहर जहां-तहां सडक़ किनारे पर खड़ा करना पड़ता है।

यात्रियों के बैठने के बाद जाम के चलते बस को स्टैंड से बाहर आने में ही 15 मिनट का समय लग जाता है। जोधपुर डिपो खुद एक दिन में 110 बसें यहां से ऑपरेट करता है। लेकिन अन्य डिपो की मिलाकर पूरे दिन में 250 से अधिक बसें संचालित होती हैं। बस अड्डे से सटी है शहर की सबसे बड़ी सब्जी मंडी। हर ओर गंदगी और जाम की स्थिति। यहां-वहां बिखरी पड़ी सड़ी-गली सब्जियां स्वच्छ भारत अभियान को चिढ़ाती हैं। 100 से ज्यादा दुकानें हैं, मगर रेड़ी चालक भारी पड़ते हैं। बस अड्डे के विस्तार के लिए मंडी को यहां से शिफ्ट करने और इस जमीन को बस स्टैंड को देने का एमओयू हो चुका है। मगर मामला सालों बाद भी खटाई में है।

क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं तो वाहन ही जाम में फंस जाता है। यह क्षेत्र की एक और बड़ी समस्या है। पूरे क्षेत्र को रेलवे पटरी दो भागों में बांटती है। दोनों छोर को जोडऩे के लिए 3 अंडरपास और 4 ओवरब्रिज बने हुए हैं। फिर भी 4 प्रमुख रेलवे फाटक ऐसे हैं जहां प्रतिदिन 20 से अधिक ट्रेनों के आवागमन के कारण जाम लग जाता है।

आगे मगरा-पूंजला क्षेत्र की ओर बढ़े तो पहाडिय़ों पर बने मकानों ने कदम रोक लिए। यहां पहाड़ काट कर धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है। पहाड़ों पर मकानों की संख्या डेढ़ सौ से भी ज्यादा है। यहीं नहीं, क्षेत्र की अन्य पहाडिय़ों को भी काटकर लोग बस गए हैं। प्रशासन जानता है कि यह अवैध हैं और खाली करने के नोटिस भी जारी हुए। मगर राजनीतिक रसूखात बीच में आ जाते हैं। अतिक्रमण किस प्रकार लोगों की समस्याएं बढ़ाता है यह तब महसूस हुआ जब क्षेत्र की सबसे बड़ी पूंजला नाडी और रामतलाई नाडी की बदहाल स्थिति देखी। कभी लबालब भरने वाली इन नाडियों की राह में इस हद तक अतिक्रमण कर लिए गए हैं कि अब बमुश्किल पानी पहुंच पाता है। रामतलाई नाडी की स्थानीय लोगों ने सफाई कर टैंकरों से पानी भरवाया है। मंडोर का ही क्षेत्र है फूलबाग। जहां से सर्वाधिक बढ़त अशोक गहलोत लेते हैं। यहां सडक़ें, सीवरेज की सुविधाएं तो ठीक दिखी। लेकिन एक बड़ी नहर वर्षों से बीमारियां बांट रही है। नागादड़ी से सुरपुरा तक साफ पानी ले जाने के काम आने वाली यह नहर अब गंदे पानी का नाला बन गई है।

यहां से मंडोर सेटेलाइट अस्पताल पहुंचे। दोपहर का समय था तो 15-20 लोगों से ज्यादा मरीज-परिजन नहीं थे। औसतन 500 के आउटडोर वाला यह अस्पताल किसी प्रकार की सर्जरी नहीं कर पाता। कारण है निश्चेतना विशेषज्ञ की कमी, कुछ दिन पहले तक तो रेडियोलॉजिस्ट व पैथोलॉजिस्ट भी नहीं थे। ऐसे में रोग जांच भी नहीं हो पाती थी। अब कुछ स्थिति सुधरी है। लेकिन अब तक सीजेरियन प्रसव नहीं हो पाते। क्षेत्र का बड़ा हॉस्पिटल पावटा जिला अस्पताल है। एक दिन में औसतन एक हजार लोग उपचार करवाने पहुंचते हैं। डिजिटल सिस्टम के बावजूद पर्ची के लिए कतारें दिखी। 37 चिकित्सकों के पद स्वीकृत है। काम पर आते हैं 28-30 चिकित्सक।

इसी विधानसभा क्षेत्र में कलक्ट्री और हाईकोर्ट स्थित है। कचहरी परिसर में स्थानाभाव के चलते अव्यवस्था सा माहौल है। विधानसभा की तर्ज पर पाली रोड पर हाईकोर्ट का नया भवन बनकर तैयार है, लेकिन अभी शिफ्टिंग नहीं हो पाई है। यहां खड़े-खड़े बारिश के दिनों की याद आ गई। बरसात के दिनों में तो कलक्ट्री और इसके चारों ओर इतना पानी भर जाता है कि शहर के अन्य इलाकों से इसका सम्पर्क ही टूट जाता है। बरसाती पानी का भराव समस्या बरसों बाद भी जस की तस है। हर साल कोई बह जाता है, तो कभी दीवार ढहने से बेमौत मारा जाता है।

क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं

- पानी निकासी की व्यवस्था समुचित नहीं, बारिश में जल भराव।- मुख्य मार्ग पर भारी यातायात दबाव, कोई नया प्रोजेक्ट नहीं।
- विधानसभा क्षेत्र के आधे से ज्यादा हिस्से में सीवरेज और पेयजल सिस्टम सालों पुराना।
- बस स्टैंड और सब्जी मंडी का सालों से अटका विस्तार प्रोजेक्ट
- जल स्रोतों और पहाड़ी क्षेत्रों में अतिक्रमण


पिछले चुनाव का परिणाम

प्रत्याशी - पार्टी - मत - मत प्रतिशत
अशोक गहलोत - कांग्रेस - 77835 - 54.96
शम्भूसिंह खेतासर - भाजपा - 59357 - 51.91
जीत का अंतर - 18478
नोटा - 1779 - 1.26

दो भागों में होते हैं काम

इस क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा दोनों का जातिगत वोट बैंक है। इस लिहाज से यहां सरकार के साथ ही विकास कार्य की गति और दिशा भी बदल जाती है। कांग्रेस सरकार और विधायक अपने क्षेत्र में ज्यादा काम करवाते हैं तो भाजपा के नगरीय निकायों ने इस बार बजट इस विधानसभा क्षेत्र के खास हिस्से पर खर्च किया है। विकास कार्यों में भी जातिगत समीकरणों का ख्याल रखा गया है।


महिलाओं और युवाओं के मुद्दे

महिलाओं और युवाओं दोनों के लिए प्रमुख मुद्दा महंगाई ही है। रसोई गैस सिलेंडर और पेट्रोल के भाव पर भी अधिकांश लोग वर्तमान सरकार से नाराज है। महिलाओं की स्थानीय समस्या सुरक्षा को लेकर भी है। चेन स्नेचिंग और शराबी प्रवृति के लोगों से भी महिलाएं भयभीत हैं।

खास मौकों पर ही दिखेक्षेत्र के विधायक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं। ऐसे में चंद खास मौकों के अलावा उन्हें क्षेत्र में कम देखा गया। इसी प्रकार प्रतिद्वंदी रहे शम्भूसिंह खेतासर भी अब चुनाव के समय पुन:सक्रिय हुए हैं।

सरकार के साथ चले गए वादे
गहलोत ने 2013 के चुनावी साल में सीएम रहते हुए जोधपुर शहर के लिए मेट्रो ट्रेन और अस्पताल में नए ओटी, सुविधाओं की घोषणा की थी। इसके अलावा जोधपुर के महामंदिर क्षेत्र में एक सभा में उन्होंने सरकार बनने पर सरकारी अस्पतलों में सीटी स्कैन, एमआरआई जांचें भी नि:शुल्क करने की बात कही थी। सरकार बनी नहीं इसलिए ये वादे पूरे नहीं हुए।


विधायक मद की स्थिति

वर्ष - वित्तीय स्वीकृति - कार्य संख्या
2014-15 - 00 - 00
2015-16 - 39.065 - 03
2016-17 - 72.138 - 12
2017-18 - 627.755 - 49
2018-19 - 373.049 - 108
स्वीकृतियां शेष रहीं- 23.478