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रोजगार के साथ बंद होने से सैकड़ों परिवारों को आ रही आर्थिक परेशानी, एक ही सवाल उधारी से कब तक करे गुजारा

शहर में लॉकडाउन का दूसरा चरण शुरू हो गया है। कोरोना की महामारी को रोकने के लिए कई थानों क्षेत्रों में कफ्र्यू लगा हुआ है। लेकिन इन सब के बीच उन लोगों को घर चलाने में दिक्कत आ रही है जो रोज कमाकर खाते है। आलम यह है कि कई परिवारों की बचत खत्म हो गई है उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि दानवीर भोजन पैकेट दे जाते है।
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poor families are helpless due to coronavirus lockdown in jodhpur

रोजगार के साथ बंद होने से सैकड़ों परिवारों को आ रही आर्थिक परेशानी, एक ही सवाल उधारी से कब तक करे गुजारा

ओम टेलर/जोधपुर. शहर में लॉकडाउन का दूसरा चरण शुरू हो गया है। कोरोना की महामारी को रोकने के लिए कई थानों क्षेत्रों में कफ्र्यू लगा हुआ है। लेकिन इन सब के बीच उन लोगों को घर चलाने में दिक्कत आ रही है जो रोज कमाकर खाते है। आलम यह है कि कई परिवारों की बचत खत्म हो गई है उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि दानवीर भोजन पैकेट दे जाते है। ऐसे में जैसे-तैसे लॉकडाउन के दिन बीत रहे है। ऐसे कुछ परिवारों से पत्रिका टीम ने बातचीत की तो उन्होंने अपनी पीड़ा बताई।

किसी ने कहां उधारी से गुजारा हो रहा है तो किसी ने कहां दानदाता भोजन पैकेट देकर जा रहे है तो किसी ने कहां भोजन के अलावा घर चलाने के लिए ओर भी कई जरुरतें होती है उन्हें पूरा करने के लिए पैसे तो चाहिए। लॉकडाउन खुले तो काम पर जाए ओर जिससे उनके घर में भी चूल्हा जल सके। यह जोधपुर शहर में रहने वाले चार-पांच परिवारों को नहीं ऐसे सैकड़ों परिवारों की व्यथा है जो रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं। उनके लिए लॉकडाउन मानो आफत बनकर आया है।

व्यथा बताते-बताते छलकी वृद्धा की आंखें
शहर के पंचोटिया नगर में एक झोपड़ीनुमा मकान नजर आया। न लाइट की व्यवस्था न गैस कनेक्शन, नहाने के लिए बाथरूम तक नहीं। इतने में 67 वर्षीय वृद्धा आईचुकी देवी घर से बाहर आई। कोई समस्या तो नहीं है यह पूछने पर वृद्धा ने बताया कि बेटे की मौत दो वर्ष पूर्व हो चुकी है। घर में दस सदस्य है और कमाने वाले सिर्फ 22 साल का पोता विकास है। वो भी लॉकडाउन के कारण बेरोजगार है। इतना कहते उनकी आंखे छलक गई। उन्होंने बताया कि उधारी से इन दिनों घर की गाड़ी चल रही है। कभी-कभी दानदाता भोजन पैकेज दे जाते है लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलेगा। लॉकडाउन खुले तो घर में आमदानी आए। उन्होंने बताया कि अभी घर पर वह अपनी 12 साल की पोती के साथ रह रही है। पुत्रवधु घर के अन्य सदस्यों के साथ लॉकडाउन से पहले अपने पीहर गई थी ऐसे में वह अभी वही फंसी हुई है।

साहब, उधार से कब तक चलाए काम
पंचोटिया नगर में एक टूटे से मकान में रहने वाले बबूल उर्फ बाबूलाल ने बताया कि लाइट फिटिंग का काम करते है। लेकिन लॉकडाउन के चलते बेकारा बैठे है। घर में न तो गैस का चूल्हा है ओर न ही लाइट का कनेक्शन। दानदाताओं के भरोसे इन दिनों पेट भर रहे है। काम पर जाना चाहते है लेकिन लॉकडाउन के चलते कोई काम नहीं मिल रहा। ऐसे में कर्जा भी हो गया है। घर में बैठे-बैठे परेशान हो रहे है। भगवान से दुआ करते है कि लॉकडाउन खुल जाए जिससे फिर से काम पर जा सके और अपनी मेहनत की कमाई से पेट भर सके।

भाईयों की मदद से चल रहा घर
लड्ढ़ा कॉलोनी निवासी हेमराज तंवर का कहना है कि लॉकडाउन ने तो उनकी कमर तोड़ दी। वे टेक्सी चलाते थे और पत्नी घर पर सिलाई करती थी। दोनों ही काम लॉकडाउन के चलते बंद पड़े है। तीन बच्चों सहित पांच सदस्यों का परिवार है। रोजगार ही नहीं है तो घर कैसे चलाए। भला हो बड़े भाईयों ओर मां का जिन्होंने हमारी कमजोर आर्थिक स्थिति देखते हुए घर पर राशन सामग्री भी पहुंचा दी और मां ने लाइट बिल भी भर दिया। वरना मेरी तो ऐसी स्थिति है नहीं कि लाइट बिल तक भरू। भगवान से दुआ करते है कि लॉकडाउन खुल जाए।