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positive story : धींगाणा ग्रामीणों की पहल, 200 बीघा गोचर भूमि पर नि:शुल्क खड़ाई कर उगाई घास

positive story : पंचायत समिति लूणी के धींगाणा गांव अनूठी पहल देखने को मिली। ग्रामीणों ने नि:शुल्क निस्वार्थ व गो हितार्थ भाव से दर्जनों ट्रैक्टरो की सहायता से करीब 200 बीघा गोचर भूमि की खड़ाई चंद घंटों में ही कर दी।

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positive story :  धिंगाणा ग्रामीणों की पहल, 200 बीघा गोचर भूमि पर नि:शुल्क खड़ाई कर उगाई घास

positive story : धिंगाणा ग्रामीणों की पहल, 200 बीघा गोचर भूमि पर नि:शुल्क खड़ाई कर उगाई घास

जोधपुर. पंचायत समिति लूणी के धींगाणा गांव अनूठी पहल देखने को मिली। ग्रामीणों ने नि:शुल्क निस्वार्थ व गो हितार्थ भाव से दर्जनों ट्रैक्टरो की सहायता से करीब 200 बीघा गोचर भूमि की खड़ाई चंद घंटों में ही कर दी।

ग्राम पंचायत धींगाणा सरपंच बीरबल राम विश्नोई ने बताया की धिंगाणा ग्राम में करीबन 200 बीघा गोचर भूमि है। जहां पर ग्रामीणों ने युवाओं के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर संपूर्ण गोचर भूमि में सेवण, धामण, कुर्रा घास लगाने का मानस बनाया। इस पुनीत कार्य में सभी ट्रैक्टर मालिकों ने अपने ट्रैक्टर की सुविधा नि:शुल्क दी तो कुछ भामाशाह ने घास के बीज निशुल्क उपलब्ध करवाए। ट्रैक्टरों के लिए डीजल की व्यवस्था भी करवाई तो कुछ ने भोजन की व्यवस्था की। देखते ही देखते ट्रैक्टरों का कारवां बढ़ता गया। चंद घंटों में पूरी जमीन की खड़ाई कर घास की बुवाई कर दी। इस कार्य में ग्राम के युवाओं ने सम्पूर्ण गोचर में उगी झाड़ियों एवं कचरे को साफ किया तथा तालाब की भी सफाई की। ग्रामीणों ने पिछले वर्ष अकाल की स्थिति में चारे पानी की समस्या देखी थी, उससे निजात पाने के लिए बिना सरकारी सहायता के अपने स्तर पर गोचर भूमि में घास की बुवाई की। सोशल मीडिया पर ग्रामीणों के जोश को देखते हुए गांव के आसपास के लोग भी अपने ट्रैक्टर लेकर सहयोग करने पहुंचे।
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बदहाली के आंसू बहा रही झालामंड की कॉलोनियां

जोधपुर. न्यू हाईकोर्ट के समीप पाली रोड पर खसरा संख्या 5 का शांति नगर इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा की वजह से बदहाली के आंसू बहा रहा है। 100 से अधिक भूखंडों वाले इस नगर में सरकारी सेवा में कार्य करने वाले कर्मचारियों की संख्या अधिक है, लेकिन विकास के दावे यहां पर खोखले हैं।
कॉलोनी काटते समय कॉलोनाइजर ने लोगों से मूलभूत सुविधाओं का विकास कराने का वादा किया था लेकिन धरातल पर यहां लोग पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रहे हैं। ऐसे में लोगों को मुंह मांगे दामों पर पानी के टैंकर खरीदने पड़ रहे हैं। कॉलोनी में अभी तक पेयजल लाइन भी नहीं बिछाई जा सकी है।