
Jodhpur News: जोधपुर शहर का ड्रेनेज सिस्टम खराब है। जहां से हाईवे निकले हैं, वहां भी जल भराव होता। इसीलिए घरों की बिजली घंटों तक गुल रहती है। यह बात शायद आपको सुनने में अजीब लगे, लेकिन यह सत्य है। ड्रेनेज और बिजली का संबंध पिछले 5-7 सालों में अधिक हुआ है। इस बार बारिश औसत से ज्यादा है। ऐसे में जल भराव की समस्या लगातार बनी हुई है। इसी कारण कई कॉलोनियों में बारिश बंद होने के 12 से 24 घंटे बाद भी बिजली चालू नहीं होती। करीब 3 लाख की आबादी कई घंटों तक अंधेरे में रही। कुछ केस से समझते हैं…।
केस 1 : सूरसागर क्षेत्र में बारिश के दौरान नाले का बहाव चलने से अंडरग्राउंड बिजली केबल में फॉल्ट आ गया। बारिश खत्म होने के बाद भी रात 8 बजे तक पानी का बहाव होता रहा तो फॉल्ट सुधारा नहीं जा सका। इसके बाद दो छोर के ओवरहेड जोड़ कर बिजली सप्लाई करीब 6 घंटे बाद सुचारू हुई।
केस 2 : बनाड़ के समीप 33 केवी अंडरग्राउंड लाइन में फॉल्ट आ गया। बारिश का पानी इतना भरा था कि कई घंटे तो फॉल्ट ढूंढने में लग गए। जब फॉल्ट मिला तो वह पानी के अंदर था। इसलिए कई घंटों तक इंतजार के बाद ओवरहेड कनेक्शन कर 12 घंटे बाद बिजली आपूर्ति चालू की गई।
केस 3 : जोधपुर के करणी माता मंदिर के सामने कॉलोनी करीब 24 घंटों तक बिजली सिस्टम बंद रहा। पानी भराव के कारण डिस्कॉम की टीमें फॉल्ट को तलाशती रही, लेकिन हर बार मुश्किल हुई।
जिन शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में अंडरग्राउंड केबलिंग कर दी गई है वहां बिजली लाइन में फॉल्ट होने पर फॉल्ट रेक्टिफिकेशन मशीन लगाई जाती है, लेकिन पानी भरा होने के कारण यह मशीन भी काम नहीं करती। फॉल्ट मिलने के बाद भी उस जमीन पर पानी भरा होने से उसे ठीक करने में जान जाने का खतरा रहता है। इस बार मानसून सीजन में यह समस्या सबसे ज्यादा आई है। एक दिन पहले हुई बारिश में करीब 10 से ज्यादा स्थानों पर यही फॉल्ट हुआ। जिनकी मरम्मत का काम दूसरे दिन भी जारी रहा। करीब 3 लाख की आबादी कई घंटों तक अंधेरे में रही।
ग्रामीण क्षेत्र में जहां से भी हाईवे गुजरा वहां एचटी लाइनों को अंडरग्राउंड कर दिया गया। शहरी क्षेत्रों में भी आरडीएसएस योजना में अंडरग्राउंड केबलिंग काम चल रहा है। सिस्टम का 30 प्रतिशत हिस्सा भूमिगत हो चुका है। जैसे-जैसे यह काम बढ़ेगा, आने वाले सालों में घंटों बिजली गुल रहने की समस्या भी बढ़ सकती है, क्योंकि ड्रेनेज सिस्टम बहुत खराब है।
हम लगातार फॉल्ट ढूंढने में लगे रहे। पिछले 30 घंटे से लगातार फील्ड में हैं। गाड़ी लेकर जायजा लिया तो साफ पता चला कि कई भूखंडों और सडक़ किनारे पानी का भराव होने से फॉल्ट ढूंढने और उसको ठीक करने में भी परेशानी आती है।
Published on:
02 Sept 2024 09:24 am

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