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93 करोड़ के बजट पर खींचतान, आधा-आधा बंटेगा

- एयरपोर्ट विस्तार की जमीन आवंटन का पैसा बांटने के निर्देश- दक्षिण निगम की आपत्ति  
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93 करोड़ के बजट पर खींचतान, आधा-आधा बंटेगा

93 करोड़ के बजट पर खींचतान, आधा-आधा बंटेगा

जोधपुर. नगर निगम उत्तर और दक्षिण दोनों ने मिलाकर 800 करोड़ से अधिक का शहरी विकास का खाका खींचा है। लेकिन खजाना खाली है। दोनों को उम्मीद एयरपोर्ट विस्तार के लिए दी गई जमीन के बदले मिले बजट से है। लेकिन इस पर भी सियासत शुरू हो गई है। खास बात यह है कि राज्य सरकार ने इस राशि को दोनों में बराबर बांटने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन जमीन पूरी तरह से निगम दक्षिण क्षेत्र में होने के कारण विरोध भी देखा जा रहा है।

नगर निगम की आर्थिक हालत को सुधारने के लिए यूडी टैक्स की उम्मीद है। विकास कार्य पिछले 10 दिन से ठप हैं। संवेदकों ने विकास कार्यों का बहिष्कार कर रखा है और दबाव 70 करोड़ से अधिक के भुगतान का है। लेकिन वर्तमान में दोनों निगम यह राशि चुकाने में सक्षम नहीं हैं। उत्तर निगम वेतन व अन्य भत्ते भी नहीं दे पा रहे हैं। 7वे वेतन आयोग का लाभ भी निगम कर्मचारियों का पेंडिंग है। इसी कारण निगम उत्तर व दक्षिण में इस बजट के लिए खींचतान हो रहा है। दक्षिण निगम जमीन और राशि दोनों हाथ से जाने के कारण विरोध जता रहा है।

यह है पूरा मामला
नगर निगम ने रक्षा मंत्रालय को 69 एकड़ जमीन हस्तांतरित की। इसके बदले लम्बे समय से राशि मिलने का इंतजार था। पिछले बोर्ड में जब जमीन हस्तांतरित हुई तो शहर में एक ही नगर निगम था। लेकिन अब जब राशि आवंटन की बात आई तो उत्तर व दक्षिण निगम में बंट गया। रक्षा मंत्रालय ने राशि जारी करने से पहले पूछा कि किस निगम को देनी है। इस पर राज्य सरकार की ओर से स्वायत्त शासन विभाग ने दोनों निगम में यह राशि बराबर बांटने के आदेश हुए। लेकिन जमीन पूरी दक्षिण निगम के क्षेत्राधिकार में आती है।

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उत्तर के लिए वरदान: परिहार

महापौर कुंती देवड़ा परिहार ने बताया कि उत्तर निगम के पास आय के साधन ज्यादा नहीं है। टैक्स वसूली भी कम है। ऐसे में वेतन व अन्य जरूरी खर्च भी पूरी तरह से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में 46 करोड़ से अधिक की मिलने वाली राशि उपयोगी साबित होगी। ठेकेदार भुगतान सहित अन्य कार्य भी करवाए जा सकेंगे।
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दक्षिण विरोध में: वनिता
दक्षिण निगम महापौर वनिता सेठ के अनुसार यह निर्णय ठीक नहीं है। जमीन दक्षिण की है और राशि आधी मिल रही। यदि राशि आधी-आधी बांटनी भी है तब भी पहले सभी तरह का बकाया भुगतान करने के बाद बची राशि को बांटना चाहिए। अब यह होगा कि उत्तर में किए गए कार्यों का भुगतान भी दक्षिण के हिस्से से करना होगा।