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isolation coach–कोरोना को लिया गंभीरता से, रेलवे ने कैसै तैयार किए कोच

- पीएमओ के निर्देश के बाद मार्च में ही तैयार कर लिए आइसोलेशन कोच- उत्तर पश्चिम रेलवे ने तैयार किए 266 कोच, जोधपुर के 83 शामिल
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जोधपुर

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Amit Dave

Jun 22, 2020

isolation coach--कोरोना को लिया गंभीरता से, रेलवे ने कैसै तैयार किए कोच

isolation coach--कोरोना को लिया गंभीरता से, रेलवे ने कैसै तैयार किए कोच

जोधपुर।
देश में कोरोना महामारी के शुरुआती दौर व लगातार बढ़ते जा रहे संक्रमण को रेलवे ने गंभीरता से लिया। रेलवे ने ट्रेनों के एसी व स्लीपर कोचों को कोविड आइसोलेशन कोच बनाने का विकल्प रखा। ताकि विपदा के समय इन कोचों को उपयोग मरीजों को भर्ती करने के लिए हो सके। पीएमओ के निर्देशों के बाद रेलवे बोर्ड ने मार्च में ही रेलवे कोचों को आइसोलेशन कोच में परिवर्तित करने का काम शुरू कर दिया था।

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क्या है कोविड आइसोलेशन कोच
देश में कोरोना संक्रमितों के बढ़ते मामले देख प्रधानमंत्री कार्यालय ने मार्च में रेलवे कोचों को आइसोलेटेड कोचों में परिवर्तित करने की योजना बनाई। इसके तहत रेलवे बोर्ड ने देश के सभी 16 जोनों के 5321 कोचों को पुरानी डिजाइन में परिवर्तित कराने का निर्णय लिया। रेलवे ने 16 जोनों के प्रमुख स्टेशनों के वर्कशॉप्स में 5321 कोचों में 35 हजार से अधिक आइसोलेशन कोच तैयार कराए।
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कैसे हुआ इन कोचों का चयन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नॉन एसी व स्लीपर कोचों को कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए उपयोगी बताया गया। इस पर रेलवे ने अपने सभी जोनो को करीब 5 हजार पुराने व सरप्लस हो चुके कोचों को आइसोलेशन कोच में बदलने का लक्ष्य दिया। जिसमें प्रत्येक कोच अधिकतम 16 मरीजों के लिए उपयोगी हो। सभी जोनों के महाप्रंबधकों ने अपने जोन के पुराने कोचों का चिन्हीकरण कर बोर्ड को जानकारी भेजी। इसके बाद कोचों तैयार करने का काम शुरू हुआ।
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कैसे कन्वर्ट किया गया कोचों को
देश में तैयार किए गए आइसोलेशन कोच रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देशों व पैटर्न के अनुसार ही तैयार किए गए है। आइसोलेशन कोच के लिए काम में लिए गए कोचों की सभी बीच की बर्थ को हटाया गया। खिड़कियों पर मच्छर जाली लगाई गई। कोच को गर्म होने से बचाने के लिए बांस की मेट से ढका गया। प्रत्येक कोच के एक टॉयलेट को बाथरूम मे परिवर्तित किया गया । हर कोच के प्रवेश पर प्लास्टिक के पर्दे लगाए गए, ताकि मरीज़ को रहने का स्थान आइसोलेट रहे। बाथरुम के निकट पहले केबिन में साइड मे दो आक्सीजन के सिलेण्डर रखने की व्यवस्था की गई। पहले एक केबिन में दवाइयां व अन्य मेडिकल उपकरण रखने, शेष सात केबिन मरीजों के लिए व्यवस्था की गई। प्रत्येक केबिन में मानक डस्टबिन, अतिरिक्त बोतल होल्डर, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था की गई। इसके अलावा रेलवे ने तापमान की समस्या का भी हल निकाला। रेलवे की ओर से कोच में जहां पर आवश्यकता होगी वहां पर तापमान को देखते हुए रूफ आइसोलेशन के उपयुक्त इंतजाम की व्यवस्था की गई।
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उत्तर पश्चिम रेलवे में यहां तैयार हुए कोच
मण्डल-- कोचों की संख्या
अजमेर- 85
जोधपुर- 83
बीकानेर- 50
जयपुर- 48
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कुल--- 266
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