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jodhpur election result live discussion : चुनाव परिणाम के बाद सुलगता सवाल,अगला मुख्यमंत्री कौन?

जोधपुर. राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद सुलगता सवाल यह है कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा और कहां से बनेगा? मारवाड़ ने राजस्थान को चार मुख्यमंत्री दिए। ये जयनारायण व्यास, बरकतउल्लाह खां, भैरोसिंह शेखावत और अशोक गहलोत हैं। इनमें से तीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास, बरकतउल्लाह खां और अशोक गहलोत जोधपुर कांग्रेस से संबंध रखते हैं। जबकि भैरोसिंह शेखावत पाली के बाली और भाजपा से रहे। कालांतर में वे देश के उप राष्ट्रपति बने।  
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जोधपुर

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MI Zahir

Dec 11, 2018

Who will be next chief minister

Who will be next chief minister

जोधपुर.राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद सुलगता सवाल यह है कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा और कहां से बनेगा? मारवाड़ ने राजस्थान को चार मुख्यमंत्री दिए। ये जयनारायण व्यास, बरकतउल्लाह खां, भैरोसिंह शेखावत और अशोक गहलोत हैं। इनमें से तीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास, बरकतउल्लाह खां और अशोक गहलोत जोधपुर व कांग्रेस से संबंध रखते हैं। जबकि भैरोसिंह शेखावत पाली के बाली और भाजपा से रहे। कालांतर में वे देश के उप राष्ट्रपति बने। इन सबकी राजस्थान के विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका रही। व्यास शेरे राजस्थान के रूप में जाने गए तो बरकतउल्लाह खां साझा संस्कृति के प्रतिनिधि के रूप में उभरे। वहीं अशोक गहलोत के कार्यों के कारण पहले उन्हें आधुनिक मारवाड़ व बाद में आधुनिक राजस्थान का निर्माता कहा गया। एक नजर यहां से अब तक के मुख्यमंत्रियों पर :

जयनारायण व्यास

जोधपुर के जयनारायण व्यास 26 अप्रेल 1951 से 3 मार्च 1952 तक मुख्यमंत्री रहे। वे जननायक, कुशल प्रशासक व राजस्थानी भाषा के लेखक, कवि, राजस्थानी की मान्यता के प्रबल पक्षधर के रूप में जानंे गए। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू उनके कुल प्रशासन और लेखन के कायल थे। राजस्थान को उनके रूप में एक अच्छा प्रशासक मिला। उनके नेतृत्व में राजस्थान ने तरक्की के कई आयाम स्थापित किए। प्रजामंडल के नायक और कवि के रूप में भी उन्हें बहुत ख्याति मिली। वे मिशनरी पत्रकार के रूप में भी बहुत सक्रिय रहे।

बरकतउल्लाह खां
जोधपुर के बरकतउल्लाह खां 9 जुलाई 1971 से 11 अगस्त 1973 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने सामुदायिक एकता के बल पर लोकप्रियता पाई और साझा संस्कृति के कारण आज भी पुराने ब्रह्मण खुद को बरकतिया ब्राह्मण कहलाना पसंद करते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उनका काम करने का अलग अंदाज और जुदा तरीका था। उन्होंने बखूबी वित्त प्रबंधन व जनकल्याणकारी योजनाओं का निर्माण किया और वे महिलाओं, अजा, जजा व पिछड़ों के लिए मसीहा साबित हुए। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में राज्य को आर्थिक संकट से उबारा। जोधपुर और तिजारा उनके निर्वाचन क्षेत्र रहे।

अशोक गहलोत
जोधपुर के अशोक गहलोत छात्र राजनीति से आगे बढे़, संासद, केंद्रीय कपड़ा मंत्री रहे व दो बार मुख्यमंत्री बने। गहलोत 1 दिसबंर 1998 से 8 दिसंबर 2003 तक और बाद में 12 दिसंबर 2008 से 13 दिसंबर 2013 तक रहे। वे कुशल शासक और लोक कल्याणकारी मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना और मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना उन्हीं की देन है। अशोक गहलोत को उनके पिछले कार्यकाल के दौरान इंडिया टुडे ने अपने सर्वेक्षण में देश के टॉप मुख्यमंत्री के खिताब से नवाजा था। किसी मुख्यमंत्री द्वारा अपना घोषणा पत्र मुख्य सचिव को सौंपने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम से जुड़ा है। वे इंदिरा गांधी व राजीव गांधी के भी नजदीकी रहे। अब वे कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन सचिव रहते हुए पार्टी में आलाकमान राहुल गांधी के बाद दूसरे नंबर पर हैं।

भैरोसिंह शेखावत
जोधपुर संभाग के पाली जिले के बाली के पुलिस के एक सिपाही रहे भैरोसिंह शेखावते पहले विधायक, फिर मुख्यमंत्री बने। वे पहले 22 जून 1977 से 16 फरवरी 1980 तक, उसके बाद 4 मार्च 1090 से 15 दिसंबर 1992 तक और आखिर मे 4 दिसंबर 1993 से 29 नवंबर 1998 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। मुख्यमंत्री रहते हुए इजराइल की तकनीक से राजस्थान को हराभरा करने का उनका सपना था। सभी धर्मों और समुदायों के लोग उन्हें अपना कहते थे। वे जीवन पर्यंत आम आदमी की सेवा में जुटे रहे। वे देश के उप राष्ट्रपति जैसे उच्च पद तक पहुंचने वाले राजस्थान के पहले राजनेता थे।