
Rajasthan : प्रतीकात्मक फोटो, जिसे एआइ के सहयोग से बनाया गया है।
Rajasthan Education Department : राजस्थान में शिक्षा विभाग में स्कूल व्याख्याता से वाइस प्रिंसिपल बने हजारों कार्मिकों की पदोन्नति पर संकट मंडरा रहा है। हाईकोर्ट के वरिष्ठता संबंधी निर्णय के लागू होने की स्थिति में सितंबर 2025 में पदोन्नत 11 हजार 838 वाइस प्रिंसिपल में से करीब 6 हजार को पदावनत कर वापस लेक्चरर बनाया जा सकता है। करीब 11 माह से वाइस प्रिंसिपल के रूप में कार्य कर रहे कार्मिकों में इसे लेकर असमंजस है। प्रभावित कर्मचारियों ने राज्य सरकार से विभागीय सेवा नियमों और अब तक चली आ रही वरिष्ठता व्यवस्था के आधार पर मामले में ठोस कानूनी पैरवी करने की मांग की है। राज्य सरकार को इस मामले में चार महीने के भीतर निर्णय करना है।
वर्ष 2015 में 19 विषयों के 13 हजार स्कूल लेक्चरर पदों के लिए भर्ती हुई थी। सितंबर 2016 में परिणाम जारी हुए और अक्टूबर में आठ विषयों के करीब 1200 पदों पर नियुक्तियां दे दी गई। इन्हें 2016-17 को वरिष्ठता मिली। इसी दौरान भर्ती प्रक्रिया पर न्यायालय से रोक लगने के कारण शेष विषयों की नियुक्तियां रुक गई।
बाद में जून 2017 में बाकी 11 विषयों में नियुक्तियां हुई और उन्हें 2017-18 में वरिष्ठता दी गई। शेष 9 विषयों के कार्मिकों ने समान वरिष्ठता की मांग को लेकर न्यायालय की शरण ली। हालांकि इस मामले में राज्य सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है और यथास्थिति रखने के लिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्मिकों और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2022-23 में वाइस प्रिंसिपल बने और बाद में प्रिंसिपल पद पर पहुंचे कार्मिकों की स्थिति भी प्रभावित होने की आशंका है। राजनीति विज्ञान सहित अन्य विषयों में पद खाली होने और भरने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। पदोन्नति से लेक्चरर और फिर वाइस प्रिंसिपल बने करीब 3651 कर्मचारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो जाएगी। बड़े पैमाने पर सेवा रिकॉर्ड बदलने और पदावनति की स्थिति बनने पर स्कूलों में ये कार्मिक अधिशेष हो जाएंगे क्योंकि इनके वाइस प्रिंसिपल बनने पर खाली हुई लेक्चरर के पद पर सरकार ने नई नियुक्तियां कर दी थी। अब वापस लेक्चरर बनने पर अधिशेष के कारण इनका ट्रांसफर करना पड़ेगा।
न्यायालय के निर्णय को लागू करते हुए पहले से पदोन्नत वाइस प्रिंसिपल को भी राहत देते हुए अपने पद पर बरकरार रखा जाना चाहिए। किसी की पदावनति नहीं होनी चाहिए।
शंभु सिंह मेड़तिया, प्रदेश सलाहकार, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
वाइस प्रिंसिपल पदोन्नति में न्यायालय के निर्णय तथा उसमें दिए गए निर्देशानुसार विभाग को इनकी वरिष्ठता सूची जारी कर पदस्थापन करना चाहिए। दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए।
सुभाष विश्नोई, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ (विशि) जोधपुर
Updated on:
07 Sept 2026 05:57 pm
Published on:
07 Sept 2026 05:57 pm
