
हरेन्द्रसिंह बगवाड़ा
Rajasthan Assembly Election 2023 : विश्वविख्यात मथानिया मिर्च का उत्पादन करने वाले किसानों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि सोना उगलने वाले इन खेतों से कभी पेट भरने तक के लाले पड़ जाएंगे। खेतों में सुखाए जाने वाली लाल रंग वाली मिर्च की बिछावट देखने मैं मथानिया पहुंचा, लेकिन यहां के हालात एकदम उलट नजर आए। धीरे-धीरे मिर्च की खेती पूरी तरह से उजड़ चुकी है। पानी खत्म। किराना दुकानदार बिलाल अहमद ने बताया, किसान आस-पास के कस्बों में जाकर छोटा-मोटा धंधा या मजदूरी करने का विवश हैं। लाल मिर्च का रकबा एक जमाने में सत्तर हजार हेक्टेयर हुआ करता था, जो अब न के बराबर है। किसी समय मिर्च की खेती करने वाले किसान गोकल भाकर ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि इस बर्बादी को नियति मान किसान इस बारे में बात तक नहीं करते। कोई राजनेता यहां के दर्द को जयपुर में बयान नहीं करना चाहता। मथानिया के किसान नारायणसिंह ने इसका असल कारण ये बताया कि किसानों ने पारम्परिक तरीके से खेती बंद कर दी। संकर किस्मों से होने वाली अंधी कमाई ने यहां के किसानों की आंखों को चौंधिया सा दिया।
सिच्चायमाता मंदिर में सालभर आते श्रद्धालु
ओसियां के सिच्चायमाता के मंदिर में देवी के सात्विक रूप की पूजा होती है। मान्यता है कि ओसियां से निकलने वाले जैन समाज के लोग ओसवाल कहलाए। जिन्होंने देश-विदेश में जाकर अपने व्यापार कौशल की धाक कायम की। अच्छी बात यह रही कि ओसियां के रेतीलों टीलों ने पर्यटकों को अपनी ओर खींचा है। सर्दियों में विदेशी पर्यटकों के लिए यहां स्विस कॉटेज लगाए जाते हैं। वैसे मंदिर में श्रद्धालु सालभर ही आते हैं। जोधपुर की लूणी विधानसभा में काकाणी क्षेत्र है। हिरणों के लिए यह जगह खास है। फिल्म अभिनेता सलमान खान शिकार प्रकरण यही पर हुआ था। इस प्रकरण की चर्चा देशभर में हुई थी। मारे गए हिरण की याद में यहां हिरण का एक मंदिर भी बना हुआ है। लूणी नदी अवैध बजरी के खनन के लिए ज्यादा जानी जाती है।
किसान मजदूर बनने को मजबूर
किसी जमाने में मिर्च की खेती करने वाले इस किसान ने बताया कि इलाके के किसान पलायन को मजबूर हैं। लोहे के पलंग पर लोहे की जाली को मजबूती से वेल्डिंग करने में यहा के लोगों को महारथ हासिल है। रोजगार के फेर में मजदूरी करने कोई फलोदी चला गया तो कोई बीकानेर तक जा पहुंचा। हां, जो बच्चे पढ़ लिख लिए वे सरकारी नौकरी करके खुश हैं। कुछ लोग सूखी सब्जियों जैसे कैर-सांगरी, छालरे, काचरी आदि का काम करने लगे हैं। पीने के पानी के लिए टंकिया नजर जरूर आई। आईजीएनपी नहर की राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना से यहां पानी आता है।
Updated on:
31 May 2023 11:49 am
Published on:
31 May 2023 11:45 am
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