
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित एएनएम भंवरी देवी अपहरण व हत्या मामले में सीबीआई की ओर से पेश निगरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।
न्यायाधीश पीके लोहरा ने अगली सुनवाई 23 अप्रेल मुकर्रर की है। सीबीआई ने अनुसूचित जाति जनजाति मामलात की विशेष अदालत द्वारा 25 जनवरी 2019 को सीबीआई के प्रार्थना पत्र को निस्तारित करने के खिलाफ निगरानी प्रस्तुत की है।
विशेष अदालत ने एफबीआई की गवाह अम्बर बी कार की गवाही वीडियो कांफ्रेंसिंग से करवाने की बजाय उसे सम्मन जारी करने बुलाने का आदेश दिया था। ट्रायल कोर्ट के आदेश को सीबीआई की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए निगरानी प्रस्तुत की गई है।
सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक पन्नेसिंह रातड़ी मौजूद रहे। सीबीआई ने गवाह अम्बर बी कार की वीडियो कांफ्रेंसिंग से गवाही करवाने के लिए दो बार ट्रायल कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश किया, लेकिन दोनों बार उसे मंजूर नहीं किया गया। निगरानी याचिका में सभी 17 आरोपियों को पक्षकार बनाया गया है।
2011 में गायब हो गई थी भंवरी देवी
2011 में भंवरी देवी गायब हो गई थी। बाद में पता लगा कि उसकी हत्या कर दी गई है। बाद में शव जला कर उसकी राख को राजीव गांधी नहर में बहा दिया गया। इस मामले में राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा और कांग्रेस विधायक मलखान सिंह विश्नोई पर हत्या का आरोप लगा। बाद में इस मामले ने तूल पकड़ा और जांच का काम सीबीआई को दिया गया।
सीडी ने राजस्थान की सियासत को हिला कर रख दिया
भंवरी के गायब होने के कुछ दिनों बाद एक सीडी भी सामने आई जिसमें मदेरणा और भंवरी देवी की कुछ तस्वीरें थीं। इस सीडी ने राजस्थान की सियासत को हिला कर रख दिया था। ये आरोप लगे कि सीडी के जरिए भंवरी राजस्थान के मंत्री मदेरणा को ब्लैकमेल करती थी। भंवरी के रिश्ते मलखान से भी बताए गए।
Updated on:
05 Apr 2019 04:14 pm
Published on:
05 Apr 2019 04:07 pm
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