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राजस्थान दिवस विशेष : अगर सड़कों पर नहीं उतरती जनता तो गुजरात में मिल जाता माउंट आबू, कुछ ऐसे बना था हमारा राजस्थान

Rajasthan Diwas : राजस्थान में एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल सिरोही का माउंट आबू है, जहां राजस्थानियों से अधिक गुजराती सैलानियों की भीड़ रहती है। आजादी के बाद माउंट आबू को राजस्थान में शामिल करने के लिए हमें पापड़ बेलने पड़ गए थे।

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गजेंद्र सिंह दहिया
Rajasthan diwas : राजस्थान में एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल सिरोही का माउंट आबू है, जहां राजस्थानियों से अधिक गुजराती सैलानियों की भीड़ रहती है। आजादी के बाद माउंट आबू को राजस्थान में शामिल करने के लिए हमें पापड़ बेलने पड़ गए थे। आजादी के बाद देश में 565 रियासतों (राजस्थान में 19 रियासत, 3 ठिकाने व अजमेर चीफ कमिश्नर प्रांत) के एकीकरण के लिए रियासती विभाग बनाया गया। इसके प्रमुख सरदार पटेल थे। गुजरात के नेताओं की इच्छानुसार पटेल ने आजादी के 2 महीने बाद नवम्बर 1947 में ही सिरोही से राजस्थान स्टेट एजेंसी हटा दी और इसे गुजरात स्टेट एजेंसी के अधीन कर दिया। उदयपुर के एकीकरण में शामिल होने के समय अप्रेल 1947 में हीरालाल शास्त्री ने सरदार पटेल को सिरोही को लेकर दो पत्र लिखे, लेकिन पटेल ने जवाब नहीं दिया।

नेहरू को भी गच्चा दे गए
संयुक्त राजस्थान के उद्घाटन के समय 18 अप्रेल 1948 को उदयपुर आए प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के समक्ष जनता ने यह मांग रखी। नेहरू ने दिल्ली जाकर पटेल को पत्र लिखा तो पटेल ने प्रति उत्तर में लिखा कि राजस्थान की जनता को गोकुलभाई भट्ट चाहिए जो बगैर माउंट आबू के भी संभव है। नेहरू के दबाव में 26 जनवरी 1950 को माउंट आबू और देलवाड़ा को छोड़कर शेष सिरोही राजस्थान में शामिल कर दिया गया।

जनता ने चलाया आंदोलन
आबू नहीं देने पर आखिर प्रदेश की जनता ने उदयपुर प्रजामण्डल के नेता बलवंत सिंह मेहता के नेतृत्व में आंदोलन चलाया। जनता के आंदोलन और राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर आखिर एक नवम्बर 1956 को आबू और देलवाड़ा को राजस्थान में मिला दिया गया। इसके लिए 7वां संविधान संशोधन करना पड़ा।

7 चरणों में बना प्रदेश, चौथे चरण में मनाते हैं स्थापना दिवस
राजस्थान का एकीकरण 7 चरणों में पूरा हुआ था। चौथा चरण 30 मार्च 1948 को हुआ था इसे ही राजस्थान दिवस के तौर पर मनाते हैं क्योंकि इस दिन राजपूताना की चारों बड़ी रियासतें उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर वृहत्त राजस्थान में शामिल हो गई थी। कुछ छोटे-मोटे हिस्से ही बाहर रहे थे।

राजस्थान निर्माण के 7 चरण
1. पहला चरण: 18 मार्च 1948 को अलवर, भरतपुर, करोली, धौलपुर और नीमराणा को मिलाकर मत्स्य संघ बनाया।
2. द्वितीय चरण: 25 मार्च 1948 को बांसवाड़ा, बूंदी, झालावाड़, डूंगरपुर, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़, शाहपुरा, टोंक और कुशलगढ़ को मिलाकर राजस्थान संघ बनाया।
3. तीसरा चरण: 18 अप्रेल 1948 को राजस्थान संघ में मेवाड़ शामिल हुआ। संयुक्त राजस्थान कहलाया।
4. चौथा चरण: 30 मार्च 1948 को संयुक्त राजस्थान में जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर को शामिल करके वृहत्त राजस्थान का निर्माण हुआ।
5. पांचवां चरण: 15 मई 1949 को वृहत्त राजस्थान में मत्स्य संघ शामिल। वृहत्तर राजस्थान बना।
6. छठा चरण: 26 जनवरी 1950 को आबू व देलवाड़ा को छोड़कर शेष सिरोही वृहत्तर राजस्थान में शामिल किया। इसका नाम राजस्थान रखा गया।
7. सातवां चरण: 1 नवम्बर 1956 को राजस्थान में अजमेर, आबू, देलवाड़ा और मध्यप्रदेश का सुनेल टप्पा शामिल किया। झालावाड़ का सिरोंज गांव मध्यप्रदेश को दिया गया।

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