
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) में अगले साल से राजस्थानी को अनिवार्य भाषा बनाया जाएगा। यानी स्नातक प्रथम वर्ष में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं हिंदी और अंग्रेजी के अलावा अब राजस्थानी विषय भी पढ़ सकेंगे। राजस्थानी को अनिवार्य करने वाला जेएनवीयू विश्वविद्यालय प्रदेश का दूसरा विश्वविद्यालय होगा। इससे पहले इस साल महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर ने राजस्थानी को अनिवार्य विषय के तौर पर लागू किया है।
कुलपति ने की घोषणा
मायड़ भाषा दिवस के मौके पर जेएनवीयू और मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जेएनवीयू के कुलपति प्रोफेसर कन्हैयालाल श्रीवास्तव ने राजस्थानी को अनिवार्य विषय बनाने की घोषणा की। वर्तमान में विश्वविद्यालय में बीए, बीकॉम और बीएससी करने वाले विद्यार्थियों को हिंदी या अंग्रेजी अनिवार्य विषय के तौर पर लेना पड़ता है। यह विषय 3 वर्ष में कभी भी उत्तीर्ण कर सकते हैं। अब इसमें राजस्थानी भी जोड़ा जाएगा।
अकादमी परिषद में लाया जाएगा प्रस्ताव
विश्वविद्यालय की ओर से राजस्थानी विषय को अनिवार्य बनाने को लेकर विवि की अकादमिक परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा। यहां से प्रस्ताव पास करने के बाद सिंडिकेट में उस पर मोहर लगाई जाएगी। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से इसे लागू किया जाएगा।
जयपुर को छोड़कर पूरे प्रदेश में राजस्थानी विभाग
राजधानी स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर को छोड़कर प्रदेश के लगभग समस्त बड़े सरकारी विश्वविद्यालय में राजस्थानी विभाग है। जोधपुर के व्यास विश्वविद्यालय के अलावा एमडीएस अजमेर, मोहनलाल सुखाड़िया विवि उदयपुर, महाराजा गंगासिंह विवि बीकानेर और कोटा स्थिति वर्द्धमान महावीर विश्वविद्यालय में भी राजस्थानी विभाग कार्यरत है।
कुलपति की इस घोषणा के बाद राजस्थानी विषय का प्रस्ताव अकादमी परिषद में लाया जाएगा। यहां से पास होने के बाद यह लागू हो जाएगा।
डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित, राजस्थानी विभाग, जेएनवीयू जोधपुर
Published on:
23 Feb 2024 10:24 am
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