साल 2014 के बाद देश की हर संस्था पर प्रहार: अभिषेक मनु सिंघवी

Abhishek Bissa | Publish: Feb, 09 2019 07:37:41 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

राज्यसभा सांसद व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि देश में शासन व सुशासन के लिए कुछ संस्था व स्तंभ की आवश्यकता होती है।

 

भाजपा की नीतियों पर राज्य सभा सांसद व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने किया जमकर प्रहार

जोधपुर. राज्यसभा सांसद व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि देश में शासन व सुशासन के लिए कुछ संस्था व स्तंभ की आवश्यकता होती है। भारत आजादी से साल 2014 तक इन संस्थाओं से ही चला है, लेकिन साल 2014 के बाद देश की हर संस्था पर प्रहार हुआ है। चाहे आरबीआइ कह दीजिए या फिर सीबीआइ। सभी में आज भय का वातावरण है।
सर्किट हाउस में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में राज्य सभा सांसद डॉ. सिंघवी ने कहा कि इन सभी से देश पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साल 1957 से कोई पड़ोसी देश पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है। जो लोकतंत्र ब्रिटेन व बैल्जियम से निकला, अब तो अफ्रीका व दक्षिण अमरीका जैसे कई देशों में लोकतंत्र स्वतंत्र नहीं रहा है, सिवाय भारत देश के। उसके लिए हमारे स्तंभ आवश्यक है। वैसी स्थिति भारत की नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के सीबीआई व पुलिस मामले पर कहा कि 70 साल में कोई सोच नहीं सकता था कि नंबर 1 अपने नंबर 2 को गाली देगा। इन बातों को डॉ. सिंघवी ने देश के साथ मजाक बताया। उन्होंने कहा कि शारदा-नारदा केस को उच्चतम न्यायालय ने सीबीआइ को ट्रांसफर साल 2014 में किया। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने अच्छा काम किया। ये केस पश्चिम बंगाल, उड़ीसा व छत्तीसगढ़ का है। इसलिए इसमें अकेले कार्य पश्चिम बंगाल पुलिस नहीं कर सकती है। इसलिए सीबीआई को सौंपा गया। इस बीच साल 2014 से 2019 तक कोलकत्ता पुलिस कमिश्नर के विरुद्ध एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। दो दिन पहले पीएम मोदी की रैली होती है, इसके बाद रविवार को 25 अफसर कार्रवाई करने पहुंच जाते है। ये पुलिस कमिश्नर व सीबीआई की बात नहीं है। ऐसे हालातों में देश की संस्थाएं चूर-चूर हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें आती और जाती रहेगी, लेकिन इसका भारत पर बहुत दुष्प्रभाव पड़ेगा। ऐसी संस्थाओं से आमजन का विश्वास उठ रहा है। ऐसी बातें देश में साल 2014 से पहले कभी नहीं होती थी। ये सभी मामले देश के अंत की शुरुआत है। आने वाली सरकारों को इन्हें ठीक करना भी आसान नहीं होगा। देश की संवैधानिक संस्थाओं और रीढ़ की हड्डी को दूरगामी नुकसान पहुंचाया गया है। नई सरकार को प्रत्यनशील होकर ऐसी संस्थाओं को सुधार लाना पड़ेगा। प्रियंका गांधी के कांग्रेस से जुडऩे के सवाल पर डॉ. सिंघवी ने कहा कि ये कायकर्ताओं की भावनाएं थी कि वे अपना औजस्व व तीव्रता पार्टी को दिखाए। अब कांग्रेस में हर्ष के भाव है कि वे पार्टी से जुड़ी है। वे नीचले स्तर पर लडऩे व जूझने को तैयार है। रॉबट वाड्रा पर डॉ. सिंघवी ने कहा कि उनको स्टे मिला हुआ था, उन्होंने कहा भी था कि वे वापस आएंगे। वे आ भी गए। कानूनी प्रक्रिया चल रही है। सत्तारुद्ध पार्टी के प्रवक्ता सीबीआइ व इडी के कागज टीवी पर दिखा रहे है। ये कागज साल 2014 के बाद अब 2019 में न्यूज चैनल पर दिखाकर राजनीति की जा रही है। इसका उद्देश्य मामला उछालना व खिलवाड़ करना है। कोई ठोस तथ्य नहीं लाए जा रहे है। अब समय आ गया है, सबकुछ जनता समझने लगी है। उन्होंने भाजपा की मोदी सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने महागठबंधन पर कहा कि आज वोट विभाजन रोकना आवश्यक है। कई जगहों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र अयोग्य विजय पाते है। वे गलत रूप से जीतते है, क्योंकि वोटों का विभाजन होता है। वर्चस्व की लड़ाई पीएम मोदी की है, गठबंधन में किसी की लड़ाई नहीं है। सर्किट हाउस में कई कांग्रेस नेताओं ने डॉ. सिंघवी का स्वागत किया।

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