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ऱाम वनवास से जुड़ा दुर्लभ ग्रंथ जोधपुर में

भारत के 45 दुर्लभ ग्रंथों में शामिल है आर्ष रामायण
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ऱाम वनवास से जुड़ा दुर्लभ ग्रंथ जोधपुर में

जोधपुर के प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में मौजूद आर्ष रामायण के वनपर्व से जुड़े चित्रों में मरीची की ओर से हरिण वेश में सीता को ललचाने के दृश्य व दशानन रावण के एक मुख का मध्य भाग गदर्भ का बनाया हुआ है ।

नन्द किशोर सारस्वत

जोधपुर. भगवान राम के वनवास गमन से जुड़ा 371 साल प्राचीन दुर्लभ ग्रंथ
आर्ष रामायण जोधपुर के पीडब्ल्यूडी रोड स्थित राजस्थान प्राच्य विद्या
प्रतिष्ठान में मौजूद है। वर्ष 1649 में लिपिबद्ध मेवाड़ के महाराणा
जगतसिंह ने स्वर्णांकित दुर्लभ ग्रंथ तैयार करवाया था। विश्व विख्यात
आर्ष रामायण में अरण्य काण्ड वनपर्व के कुल 36 चित्र है जिनमें सीता हरण,
जटायुवध, अगस्त्य ऋषि आश्रम में राम-लक्ष्मण-सीता गमन, सूपर्णखा नाक
विदिर्ण करते हुए लक्ष्मण आदि के सूक्ष्म मनमोहक चित्र मेवाड़ शैली में
बने है।

बालकाण्ड लंदन व अयोध्याकाण्ड मुंबई में संरक्षित
दशानन वध के बाद भगवान राम के दिवाली के दिन अयोध्या लौटने पर
अयोध्यावासियों की ओर से स्वागत के चित्र भी मनमोहक हैं। अयोध्या लौटने
पर राम-लक्ष्मण के साथ भरत व शत्रुघ्न को उनकी पत्नियों के साथ स्वागत
करते दर्शाया गया है। आर्ष रामायण बालकाण्ड प्रथम और अयोध्याकाण्ड मुंबई
के प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम में हैं, लेकिन किष्किन्धा व बालकाण्ड
द्वितीय और युद्धकाण्ड ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में संरक्षित हैं। प्राच्य
विद्या प्रतिष्ठान में आर्ष रामायण का अरण्यकाण्ड वनपर्व मौजूद है।

सम्पूर्ण भारत के दुर्लभ 45 ग्रंथों में से एक
प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में मौजूद आर्ष रामायण के वनपर्व से जुड़े
चित्रों में मरीची की ओर से हरिण वेश में सीता को ललचाने के दृश्य का
सुंदर चित्र है। इस चित्र में दशानन रावण के एक मुख का मध्य भाग गदर्भ का
बनाया हुआ है। नेशनल ट्रेजर में चयन आर्ष रामायण ग्रंथ सम्पूर्ण भारत के
दुर्लभ 45 ग्रंथों में से एक है जिन्हे राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन नई
दिल्ली की ओर से नेशनल ट्रेजर ऑफ इंडिया घोषित किया गया है। वर्ष 2007
में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में भी आर्ष
रामायण को प्रदर्शित किया गया था।

मेवाड़ शैली में बने है चित्र
आर्ष रामायण वर्ष 1649 में लिपिबद्ध मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह की ओर से
तैयार करवाया गया महत्वपूर्ण ग्रंथ है। रामलक्ष्मण के अरण्यकाण्ड के 36
सुनहरी चित्र अंकित है। सूक्ष्म मनमोहक चित्र मेवाड़ शैली में बने है।
कमल सांखला, वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान जोधपुर.