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खीचन से कुरजां की वतन वापसी, बिछुडऩे से 6 यहीं रह गई

शीत ऋतु की विदाई के साथ ही खीचन से कुरजां वतन वापसी की उड़ान भर चुकी थी। इस बीच कुछ पक्षी अपने साथियों से बिछड़ गए है। अब खीचन के तालाब पर 6 कुरजां विचरण करती दिख रही हैं।
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Return of the karajn, 6 stayed in Khichan

Illegal trade of sand in Barhi police station area

फलोदी (जोधपुर) . सात समन्दर पार कर शीतकालीन प्रवास पर फलोदी तहसील के खीचन गांव आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां ने इस शीत ऋतु की विदाई के साथ ही वतन वापसी शुरू कर दी थी तथा मार्च माह में खीचन से अधिकांश कुरजां वतन वापसी की उड़ान भर चुकी थी।

इस बीच कुछ पक्षी अपने साथियों से बिछड़ गए है। अब खीचन के तालाब पर 6 कुरजां पक्षियों को विचरण करते देखा जा रहा है। ये पक्षी अपने साथी कुरजां के समूहों के साथ उड़ान नहीं भर पाए है तथा अब भीषण गर्मी में खीचन के तालाबों पर विचरण कर रही है। ऐसे में यदि ये पक्षी अब भी वतन वापसी नहीं कर पाए तो इनके बीमार होने की आशंका बनने लगेगी।



पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि कुछ पर्यटक खीचन तालाब पर आए थे। इस दौरान विजयसागर तालाब पर 6 कुरजां पक्षियों के विचरण करते हुए देखा गया है। उन्होंने बताया कि ये कुरजां अपने समूहों से बिछुड़ गई है तथा वतन वापसी नहीं कर पाई है। अब भीषण गर्मी में इन पक्षियों के स्वास्थ्य पर संकट के बादल मंडराने लगे है।


जीवित रहे, तो अगले प्रवास में मिलेंगे साथियों से

कुरजां की वतन वापसी के बाद यहां पीछे छूट गए पक्षियों के इस गर्म वातावरण में अनुकूलित होना काफी कठिन होगा। क्योंकि ये पक्षी 30 डिग्री तापमान तक अनुकूलित रहते है। अपने समूहों से बिछड़़ गई इन कुरजां की वतन वापसी नहीं हुई तो यहां भीषण गर्मी के दौरान 48-50 डिग्री सैल्सियस तापमान में पक्षियों के बीमार होने की आशंका भी है। यदि ये पक्षी क्षेत्र में विचरण करते रहे और जीवित बच गए तो अगली शीत ऋतु में प्रवास पर आने वाले पक्षियों के साथ मिल जाएंगे और उनके साथ वतन वापसी कर सकेंगे।

समूह से बिछुडऩे के होते है कई कारण

शीतकालीन प्रवास के बाद वतन वापसी के दौरान कुछ पक्षियों के पीछे रह जाने के कई कारण होते है। इसमें कुछ पक्षियों के बीमार होने, कमजोरी आदि हो सकते है। संभावना है कि, ये पक्षी भी वतन वापसी कर सकते हैं। यदि वतन वापसी नहीं होती है, तो ये पक्षी ज्यादा तापमान में बीमार भी हो सकते हैं।
-डॉ. सुमित डूकिया, असिस्टेंट प्राफेसर, गुरु गोविन्द सिंह, इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली