मरीज ने 90 दिन खींच लिए तो समझो कोविड ने बख्श दी जान

- सुनामी है पोस्ट कोविड मरीजों में लंग्स फाइब्रोसिस
- दुनिया के मशहूर चिकित्सकों के शोध में खुलासा

By: Jay Kumar

Published: 10 Jun 2021, 10:56 AM IST

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. कोरोना संक्रमण के साथ लंग्स फाइब्रोसिस के मरीज भी तेजी से बढऩे लगे हैं। फेफड़ों के उत्तक यानी टिश्यू में सूजन की इस बीमारी में 90 दिन गुजार देने वाले कई मरीजों के फेफड़े ठीक भी हुए हैं, लेकिन अन्य व्याधियों के कारण गंभीर हुए मरीजों पर ये बीमारी जानलेवा साबित हो रही है।

हिंदुजा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल मुंबई, श्रीनगर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग और इटली रोम की एक यूनिवर्सिटी के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के संयुक्त रिसर्च में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कोविड को धरती का भूकंप और पोस्ट कोविड में लंग्स फाइब्रोसिस को सुनामी करार दिया है।

लंग्स फाइब्रोसिस में फेफड़ों के अंदर मौजूद टिश्यू सूजने लगते हैं। इससे मरीज में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। शरीर में खून का बहाव कम होने लगता है। मल्टी आर्गन फेल्योर होने लगते हैं और मरीज की मौत तक हो जाती है।

जोधपुर में भी कोरोना संक्रमण से नेगेटिव आने के बाद कई मरीजों की लंग्स फाइब्रोसिस से जान चली गई। हालांकि इन मरीजों में अन्य बीमारियां भी थी। चिकित्सकों का कहना हैं कि ये मरीज ९० दिन और निकाल लेते तो इनके बचने की उम्मीद थी।

पॉजिटिव सोच व व्यायाम ने बचाई जान
कई मरीजों को कोरोना के बाद लंग्स फाइब्रोसिस हुआ। सकारात्मक रहते हुए डॉक्टर्स की सलाह अनुसार ऑक्सीजन पर रहते हुए सांस के व्यायाम करने वाले ऐसे कई मरीज ९० दिन में ठीक हो गए। जबकि अन्य बीमारियों से घिरे मरीज ४८ घंटे भी बमुश्किल निकाल पाए। उल्लेखनीय हैं कि पोकरण के बीडीओ गौतम चौधरी का सीटी स्कोर २५ में से २५ आया। वे यहां एक महीने अस्पताल में भर्ती रहे। उनका लंग्स फाइब्रोसिस धीरे-धीरे ठीक हो गया और उन्होंने ड्यूटी भी ज्वॉइन कर ली। जोधपुर में करीब २ हजार लोग इस बीमारी से ठीक होकर घर पहुंचे हैं।

कोरोना का दो तरह से फेफड़ों पर हमला
पल्मोनोलॉजिस्ट व क्रिटिकल केअर विशेषज्ञ डॉ. अंकित राठी के अनुसार कोरोना संक्रमण फेफड़ों पर दो तरह से हमला करता है। पहला क्लोटिंग करके खून के थक्के जमाता है और दूसरा सांस की एल्बोलाइ में पानी भर देता है। ये धीरे-धीरे खत्म होता है। ये कोविड मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पर भी ऑक्सीजन पर रहते है। धीरे-धीरे इनमें ऑक्सीजन की रिक्वायरमेंट कम हो जाती है और वे ठीक हो जाते है। डॉक्टर डी-डाइमर, आईएल-६, एलडीएच सहित अन्य जांचों के जरिए संक्रमण की स्थिति देखकर फाइब्रोसिस की पहचान कर लेते हैं। कोविड से पहले सामान्य आइएलडी (इंटरस्टीशियल लंग डिजीज) में फाइब्रोसिस आगे बढ़ता रहता है और मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है।

Jay Kumar
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