
संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी : पांच साल में एफडी दुगुनी, आरडी में ज्यादा ब्याज का झांसा
जोधपुर. सरकारी बैंकों में एफडीआर यानि फिक्स डिपोजिट रिसिप्ट पर सामान्यत: साढ़े छह से सात साल में राशि दुगुनी होती है। यानि करीब साढ़े सात प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है। आरडी खाता खुलवाने पर भी लगभग इसी दर से ब्याज देना प्रस्तावित है। इसके उलट संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी ने एफडीआर कराने पर सिर्फ पांच साल में राशि दुगुनी करने का झांसा देकर आमजन से करोड़ों रुपए जमा किए।
वहीं, आरडी खाते में निवेश करने पर भी सरकारी बैंक से तीन से साढ़े तीन प्रतिशत अधिक दर से ब्याज देने का झांसा दिया गया था। यही वजह है कि राज्य के 1.47 लाख निवेशकों के 953 करोड़ रुपए संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी में फंसे हुए हैं।कमीशन के लालच में सोसायटी के एजेंटों ने बड़ी संख्या में अपने रिश्तेदार और परिचितों को विश्वास में लेकर राशि निवेश कराई।
पुत्रियों के नाम तीन एफडीआर, फंसे आठ लाख रुपए
रातानाडा निवासी सुमेरसिंह ने सात वर्ष पहले अपनी पुत्री सपना, अंजलि व रेखा के नाम आठ लाख रुपए की तीन एफडी संजीवनी क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी में कराई थी। एजेंट ने पांच साल यानि 60 माह में एफडी दुगुनी होने का विश्वास दिलाया था। पांच साल होने पर एफडी दुगुनी हो गई, लेकिन सोसायटी ने राशि का भुगतान न कर उसकी अवधि बढ़ा दी। चूंकि ग्राहक की राशि सोसायटी में पहले से जमा थी इसलिए ब्याज दर भी घटा दी गई। इस बार 72 माह यानि छह साल में राशि दुगुनी होने का विश्वास दिलाया गया। आकर्षक ब्याज का लालच देकर तीनों पुत्रियों के नाम आरडी खाते भी खुलवा लिए गए। इन खातों में भी लाखों रुपए जमा हो चुके हैं।
संघर्ष समिति की बैठक, रणनीति पर चर्चा
उधर, नवजीवन पीडि़त संघर्ष समिति की बुधवार को उम्मेद उद्यान में बैठक हुई। नवजीवन क्रेडिट कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी के पीडि़त निवेशकों ने समिति के बैनर तले कार्रवाई को लेकर रणनीति पर चर्चा की। समिति के उपाध्यक्ष नरेश जैन ने बताया कि सोसायटी के एमडी गिरधरसिंह सोढ़ा को एसओजी गिरफ्तार कर जेल भिजवा चुकी है। उसकी जमानत याचिका का समिति की तरफ से विरोध किया जाएगा। इसके लिए हाईकोर्ट में भी याचिका लगाने का निर्णय किया गया।
Published on:
19 Sept 2019 01:18 pm
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