
-हाईकोर्ट ने एसबीआइ की ओर से जारी आदेश निरस्त किया
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने एसबीआइ की ओर से विलय से पूर्व तत्कालीन एसबीबीजे द्वारा नियुक्त बैंक मित्रों को हटाने व उनके स्थान पर प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से उनकी पुनर्नियुक्ति अथवा नए लोगों को नियुक्त करने पर रोक लगा दी। यह आदेश जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने आशीष कुमार व 35 अन्य की ओर से दायर याचिकाएं स्वीकार करते हुए दिए। आदेश में एसबीआई को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को सीधे एसबीआई के तहत कार्य करने दिया जाए। जोधपुर, बाडमेर, जालोर, नागौर, हनुमानगढ़ सहित अन्य जिलों के याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं की सुनवाई के बाद 10 मई को निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइन्स के अनुसार तत्कालीन एसबीबीजे ने रिमोट एरिया में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के मद्देनजर बैंक मित्रों की नियुक्ति के लिए भर्ती शुरू की। इसके लिए जारी विज्ञापन के तहत याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया। परीक्षा, इंटरव्यू, दस्तावेजों के अवलोकन सहित नियुक्ति के बाद बैंक के साथ काँट्रेक्ट व सिक्यूरिटी डिपोजिट के तौर पर 50 हजार की एफडीआर भी ली गई। बैंक ने याचिकाकर्ताओं को पॉस मशीन उपलब्ध कराते हुए ग्राहकों को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने के लिए पहले तीन हजार व बाद में पांच हजार रुपए वेतन के अलावा अन्य सेवाओं पर कमीशन का भी भुगतान शुरू किया। लेकिन 1 अप्रैल 2017 को एसबीबीजे के एसबीआइ में मर्जर के बाद याचिकाकर्ताओं को कॉर्पोरेटाईजेशन के नाम पर हटाने की सूचना दी गई और उनको प्लेसमेंट एजेंसीज व सर्विस प्रोवाईडर्स के माध्यम से पुन: आवेदन करने का कहा गया।