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चंद्रयान-2 का जोधपुर कनेक्शन, रिव्यू कमेटी में वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र भंडारी की महत्वपूर्ण भूमिका

बोले, लैंडर को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित उतारना सबसे बड़ी चुनौती, किलोमीटर से मीटर पर करनी पड़ेगी स्पीड, अमरीका का लेजर रिफ्लेक्टर साथ में
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ISRO chandrayaan 2 mission

चंद्रयान-2 का जोधपुर कनेक्शन, रिव्यू कमेटी में वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र भंडारी की महत्वपूर्ण भूमिका

गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ( ISRO ) के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 ( Chandrayaan 2 ) के लेंडर विक्रम ( lander vikram ) को चंद्रमा की सतह पर उतारना बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों की निगाहें 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस ( Teachers day ) पर टिकी है जब विक्रम ऑर्बिटर ( vikram orbiter ) से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरेगा।

चंद्रयान 2 को हरी झंडी देने वाली रिव्यू कमेटी में शामिल जोधपुर के वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र भंडारी ने बताया कि चंद्रयान-2 के तीन भाग है। जिसमें ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) शामिल हैं। वर्तमान में चंद्रयान पृथ्वी की कक्षा में है। प्रतिदिन इसकी कक्षा की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है। करीब 23 दिन बाद यह चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेगा। डॉ भंडारी यहां तक तो बिल्कुल आश्वस्त है। उन्होंने बताया कि ऑर्बिटर 2 से 3 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाएगा।

इसके बाद इससे विक्रम यानी लैण्डर अलग होगा जिसे चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा। विक्रम के साथ रेट्रो राकेट लगा हुआ है जो उलटी दिशा में फायर होगा। जिससे विक्रम की गति किलोमीटर प्रति सेकंड से घटकर कुछ मीटर प्रति सेकंड रह जाएगी। लगभग 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यह नीचे आएगा। जिसे चंद्रमा पर सुरक्षित उतारना चुनौती रहेगी। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चट्टाने भी हैं। विक्रम को सपाट सतह पर उतारना है।

पिछले सप्ताह अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में एक बैठक में भाग लेने अमरीका पहुंचे डॉ भंडारी ने राजस्थान पत्रिका को दूरभाष पर बताया कि चंद्रयान में 13 उपकरण भेजे गए हैं। जिसमें अमरीका का लेजर रिफ्लेक्टर भी शामिल है। अमरीका ने पहले यह इजराइल मिशन के साथ भेजा था लेकिन वह फेल हो गया था। लेजर रिफ्लेक्टर से धरती पर लेजर किरणें प्राप्त कर चंद्रमा का अध्ययन किया जाएगा। चंद्रमा धीरे-धीरे ठंडा होने के साथ सिकुड़ रहा है। साथ ही यह पृथ्वी से दूर भी जाता जा रहा है। लेजर रिफ्लेक्टर से इसका अध्ययन होगा।


सुबह 5 बजे उतारने की योजना

इसरो वैज्ञानिक विक्रम को सुबह 5 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारेंगे। चंद्रमा पर उतरने के बाद विक्रम से प्रज्ञान यानी रोवर बाहर आएगा जो एक रोबोट जैसी संरचना है। चंद्रमा पर 14 दिन सूरज निकलता है और 14 दिन रात होती है इसलिए सूर्योदय के समय ही विक्रम को उतारा जा रहा है। प्रज्ञान में सोलर बैटरी लगी हुई है जो सूर्य के प्रकाश से चलेगी। इन 14 दिनों में प्रज्ञान करीब आधा किलोमीटर की दूरी तय कर लेगा। इसके बाद 14 दिन की रात आएगी तब तापमान हिमांक बिंदु से काफी नीचे चला जाएगा। उस समय प्रज्ञान को फिर से रिवाइव करने की कोशिश की जाएगी।

जोधपुर ने दी हरी झंडी, तब लॉन्च हुआ चंद्रयान-2
गौरतलब है कि इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा चन्द्रयान-2 तैयार करने के बाद उसके परीक्षण व मंजूरी के लिए एक रिव्यू कमेटी का गठन किया गया था। रिव्यू कमिटी में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के साथ कई वैज्ञानिक शामिल थे। डॉ भंडारी भी इसी कमेटी में सदस्य थे। कमेटी की पहली बैठक अप्रैल 2018 में हुई जब चंद्रयान तैयार नहीं था। इसके बाद दूसरी बैठक इस साल के शुरू में और कुछ समय बाद तीसरी बैठक हुई जिसमें चंद्रयान 2 को चंद्रमा पर भेजने की हरी झंडी दी गई।