कल से शुरू हो जाएगा सत्रह दिवसीय पितृ पक्ष

 

पितरों के लिए श्राद्ध कर्म में करें शुभ काम

By: Nandkishor Sharma

Published: 19 Sep 2021, 12:53 PM IST

जोधपुर. सनातन भारतीय संस्कृति में दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति तथा उनके प्रति श्रद्धा से जुड़ा पर्व 'श्राद्धÓ 20 सितम्बर से आरंभ हो जाएगा। सत्रह दिवसीय श्राद्ध में प्रथम दिन सोमवार को पूर्णिमा का श्राद्ध मनाया जाएगा। इस दिन भारतीय कैलेंडर के तिथि अनुसार देवलोक हुए पूर्वजों के नाम पर सगोत्र उच्चारण कर तिल, जौ, कच्चे दूध, पुष्प, डाब के साथ घरों अथवा पवित्र जलाशयों पर तर्पण किया जाएगा। मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण करने पर उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इन दिनों में पितरों के शुभ कर्म करने से परिवार के मृत सदस्यों की आत्मा को शांति मिलती है। द्वितीया तिथि वृद्धि के कारण 17 दिन श्राद्ध होंगे। पितृ तर्पण में जल अर्पित करने का बड़ा महत्व है। जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष में श्रद्धापूर्वक पितरों के निमित्त श्राद्ध करता है, उसकी श्रद्धा और आस्था भाव से तृप्त होकर पितृ उसे शुभ आशीर्वाद देकर अपने लोक को चले जाते हैं।

श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण का अर्थ

पितृ पक्ष में परिवार के दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से याद किया जाना ही श्राद्ध कहा जाता है। पिंडदान करने का मतलब ये है कि हम पितरों के लिए भोजन दान कर रहे हैं। तर्पण करने का अर्थ यह है कि हम जल का दान कर रहे हैं। इस तरह पितृ पक्ष में इन तीनों कामों का महत्व है। पितृ पक्ष में भागवत गीता का पाठ करना चाहिए।

भोजन के पांच अंश
पितृ पक्ष में पितरों के लिए भी आहार का एक अंश निकाला जाता है, तभी श्राद्ध कर्म पूरा होता है। श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के लिए। श्वान जल तत्व का, चींटी अग्नि तत्व, कौवा वायु तत्व, गाय पृथ्वी तत्व का और देवता आकाश तत्व का प्रतीक हैं। इस प्रकार इन पांचों को आहार देकर हम पंच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। केवल गाय में ही एक साथ पांच तत्व पाए जाते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में गाय की सेवा विशेष फलदाई होती है।

Patrika
Nandkishor Sharma Desk
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