10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कड़ाके की ठंड में भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा राजस्थान का ये इलाका, बूंद—बूंद के लिए तरस रहे लोग

water scracity in Jodhpur rural area भीषण पेयजल संकट
3 min read
Google source verification
severe water scarcity in Bhopalgarh of Jodhpur

severe water scarcity in Bhopalgarh of Jodhpur

भोपालगढ़/ जोधपुर। जोधपुर जिले के भोपालगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के गजसिंहपुरा गांव के बाशिन्दों के लिए पिछले करीब 70 बरसों से पीने के पानी का मुख्य स्रोत रही यहां की गंवाई नाडी ने इस बार जवाब दे दिया है और करीब आधी सदी से भी अधिक समय के बाद पहली बार इस नाडी का पानी पूरी तरह से रीत गया है। गांव में जलदाय विभाग के सार्वजनिक नलकूपों के पानी में बेहद अधिक मात्रा में फ्लोराइड होने की वजह से इनका पानी इतना खारा है, कि लोग तो क्या पशु भी नहीं पी सकते हैं। जबकि साल भर पहले आया नहरी पानी भी गांव में नहीं के बराबर पहुंच रहा है। यहां तक कि पखवाड़े भर में एकाध बार मुश्किल से घंटे-आधे घंटे के लिए ही नहरी पानी आ पाता है। ऐसे में बरसों से पीने के पानी के लिए यहां के गंवाई तालाब के पानी पर ही निर्भर रहने वाले लोग इन दिनों बेजां परेशानियों के दौर से गुजर रहे हैं और यह कहें, कि गांव का हर व्यक्ति पीने के मीठे पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है, तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

ग्रामीणों का तो यहां तक कहना है कि गांव के लोगों को दिन भर के कामकाज के बाद शाम को घर पहुंचने पर परिवार की महिलाओं से पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर ही पहला ताना सुनने को मिलता है। ऐसे में ग्रामीणों को आसपास के गांवों से महंगें भावों में टैंकरों से पानी लाना पड़ रहा है और इस वजह से लोगों के चेहरों पर अभी से ही आने वाले गर्मियों के दिनों में होने वाले संभावित हालात को लेकर चिंता की रेखाएं उभरने लगी है। करीब छह हजार से अधिक की आबादी वाले इस गांव में हर समय महिलाओं और बालिकाओं को सिर पर मटकियां और भाण्डे लेकर गांव के बीच स्थित नहरी पानी के संग्रहण के लिए बने सार्वजनिक टांके की ओर पीने का पानी लाने के लिए आते-जाते देखा जा सकता है और गांव के हर गली-मोहल्ले में महिलाओं की दिन भर पानी के लिए ही दौड़-धूप नजर आती है। जबकि सबसे भयावह हालात तो गांव का तालाब रीतने से हुई है। जो कि बरसों से लोगों की प्यास बुझाता आया है, लेकिन इस बार अरसे बाद इसने भी ऐसा जवाब दिया है, कि लोगों के सामने कोई विकल्प ही नहीं बचा है।


यह है जलापूर्ति की व्यवस्था
वैसे तो इस गांव के लोग बरसों से यहां की गंवाई नाडी के पानी पर ही निर्भर हैं और इस नाडी के पानी से ही लोगों की बरसों से प्यास बुझती आई है। वहीं सरकारी स्तर पर जलापूर्ति के लिए गांव में एक-दो सार्वजनिक नलकूप भी खुदे हुए हैं, लेकिन इनके पानी में फ्लोराईड की मात्रा और खारापन इतना अधिक है, कि पानी पीने लायक भी नहीं है। यहां तक कि लोग तो यह पानी अपने मवेशियों को भी पिलाने में कंजूसी करते हैं। ऐसे में पीने का पानी नहीं होने की इस समस्या का खामियाजा यहां के लोग भुगत रहे हैं और मजबूरन अधिकांश लोग महंगे भावों में दूसरे गांवों से टैंकरों का पानी मंगवाकर पी रहे हैं।


नहरी पानी की आपूर्ति सुचारू नहीं
गजसिंहपुरा गांव के नलकूपों में पानी तो थोड़ा-बहुत है, लेकिन इसमें फ्लोराईड की मात्रा बहुत अधिक होने की वजह से पीने लायक नहीं है और पशुधन भी यह पानी नहीं पीता है। ऐसे में जलदाय विभाग की ओर से यहां करीब साल भर पहले नहरी पानी पहुंचाया गया था और इस पानी की आपूर्ति के लिए गांव में चार-पांच जगहों पर नल भी लगवाए गए थे। जिससे लोग इन नलों का पानी एक बड़े टैंक में संग्रहित करते हैं और फिर वहां से लोग अपनी जरूरत के हिसाब से पानी ले जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से यहां नहरी पानी की आपूर्ति लगभग नहीं के बराबर हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि महीने-15 दिन में एकाध बार पानी आता है और वह भी मात्र आधे-पौन घंटे के लिए ही आता है। जो कि पूरे गांव में मात्र पांच-सात घरों के लिए भी समुचित नहीं हो पाता है। ऐसे में ग्रामीणों के सामने दूसरे गांवों से टैंकरों से पानी लाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।


यह हो सकता है समाधान
इस गांव में यदि आरओ प्लांट लगा दिया जाए और यहां के नलकूप के पानी को आरओ प्लांट में पीने लायक बनाकर लोगों को पीने के पानी की सुविधा दी जा सकती है। इसके साथ ही गजसिंहपुरा गांव के लिए ही अलग से नहरी पानी की सीधी पाइपलाइन लाकर और यहां बड़ी एसआर टंकी बनाकर गांव में जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए, तो कहीं जाकर इस गांव के लोगों की प्यास बुझ सकती है।