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बचपन से गाते थे देशभक्ति गीत, भारतीय सेना के इस सिपाही ने तीन आतंकवादियों को मार बचाई भारत माता की लाज

साधारण किसान परिवार में जन्में दमाराम जाखड़ 6 भाइयों में पांचवें थे। वह कहते हैं ना कि पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं। ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी दमाराम स्कूली दिनों में अपने सहपाठियों को देशभक्ति के गीत सुना कर सेना में भर्ती होने की इच्छा जाहिर किया करते थे।
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बचपन से गाते थे देशभक्ति गीत, भारतीय सेना के इस सिपाही ने तीन आतंकवादियों को मार बचाई भारत माता की लाज

संजय शर्मा/शेरगढ़/जोधपुर. सूरमाओं की धरती शेरगढ़ पर एक से बढकऱ एक वीर पैदा हुए हैं। जिन्होंने अपने शौर्य से वीरता की अनूठी मिसाल कायम करने के साथ ही भारत माता की लाज बचाने में अपने प्राणों तक को न्यौछावर कर दिया। ऐसी ही एक कहानी है शेरगढ़ तहसील के चाबा गांव से दो किमी दूर स्थित जाखड़ों की ढाणी के एक सपूत की जिसने देश की सुरक्षा में अपने प्राण गंवाने में देरी नहीं लगाई।

साधारण किसान परिवार में जन्में दमाराम जाखड़ 6 भाइयों में पांचवें थे। वह कहते हैं ना कि पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं। ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी दमाराम स्कूली दिनों में अपने सहपाठियों को देशभक्ति के गीत सुना कर सेना में भर्ती होने की इच्छा जाहिर किया करते थे। चाबा के सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद 26 सितंबर 1983 को 20 जाट रेजीमेंट बरेली में आयोजित हुई सेना भर्ती रैली परीक्षा में पास होने के बाद अपने सपने को पूरा किया।

खेलों में रुचि ने बढ़ाई रैंक
दमाराम एक उत्कृष्ट खिलाड़ी भी थे। इस कारण खेल कोटे से उनका प्रमोशन 4 साल में लांस नाइक के बाद नाइक हुआ और फिर बेहतर नाइक पद पर रहते हुए 3 सालों तक श्रीलंका शांति सेना का एक भाग बनकर सेवाएं दीं। यहां श्रीलंका में हुए विद्रोह में उनके पांव में गोली लग गई थी। ऐसे में करीब 5 महीने उन्हें आराम करना पड़ा। शारीरिक रूप से फिट होने पर वापस 5 राष्ट्रीय राइफल यूनिट में तैनात हो गए।

इस दौरान उन्हें जम्मू कश्मीर में ज्वाइनिंग मिली। कारगिल युद्ध में भी दमाराम ने अपने शौर्य का परिचय दिया। 5 मार्च 2000 को श्रीनगर के पीतांबर गांव के बादापुरा में आतंकवादी हमला हो गया। यहां दमाराम ने आतंकी हमले का करारा जवाब दिया। तीन आतंकवादियों को मार गिराने की कार्रवाई में उन्हें भी गोली लग गई। अत्यधिक रक्तस्त्राव से वह वीरगति को प्राप्त हुए। अपनी शहादत से दमाराम ने मातृभूमि की रक्षा की अनूठी मिसाल पेश की।

पारिवारिक परिचय
शहीद दमाराम जाखड़ के पिता पेमाराम जाखड़, माता मुली देवी, भाई गंगाराम जाखड़ सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन, चैनाराम जाखड़ कैप्टेन पद सेवानिवृत्त, पुनाराम, दिपाराम, बालाराम, पत्नी हापियो देवी, पुत्र केशाराम जाखड़ व पुत्री रामु कुमारी हैं।
गांव में शहीद का स्मारक बना हुआ है। साथ ही गांव की मुख्य स्कूल राजकीय कारगिल शहीद दमाराम जाखड़ उच्च माध्यमिक विद्यालय भी बना हुआ है।