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खीचन पहुंचा कुरजा का पहला जत्था

फलोदी (जोधपुर). साइबेरिया, कजाकिस्तान, मंगोलिया से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर खीचन आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां ने जोधपुर में दस्तक देने के बाद रविवार सुबह फलोदी के खीचन में भी दस्तक दे दी है।
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Siberian cranes in, khichan

खीचन पहुंचा कुरजा का पहला जत्था

फलोदी (जोधपुर). साइबेरिया, कजाकिस्तान, मंगोलिया से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर खीचन आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां ने जोधपुर में दस्तक देने के बाद रविवार सुबह फलोदी के खीचन में भी दस्तक दे दी है।

दरअसल कुरजां को खीचन में आज सुबह स्वच्छ विचरण करते हुए देखा तथा पहले जत्थे ने खीचन पंहुचकर अपने प्रवास स्थलों की पहचान की। खीचन में कुरजां की दस्तक के साथ ही गांव के पक्षी प्रेमियों के चेहरों पर खुशी नजर आई।

पहले जत्थे ने दी दस्तक

पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि आज सुबह 10.29 बजे कुरजां की आवाज गूंजी, तो छत पर जाकर देखा। इस दौरान आकाश में करीब 30-35 पक्षियों का एक समूह दिखाई दिया। कुरजां के आज खीचन पंहुचने के बाद पक्षी गांव में स्वच्छंद विचरण करते हुए अपने पड़ाव स्थलों की पहचान की है।


कुछ दिन तक करेंगे जांच-पड़ताल

कुरजां के खीचन पहुंचने के बावजूद पक्षी कुछ दिन तक नीचे नहीं उतरेंगे तथा दिन व रात में आकाश में उड़ते हुए ही सुरक्षा के लिहाज से पूरी जांच पड़ताल करेंगे। उसके बाद ही पक्षी नीचे उतरेंगे तथा पक्षियों की दिनचर्या शुरू होगी।

तापमान में गिरावट के साथ ही खीचन में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होगी। फिर नमक उत्पादन क्षेत्र में रात्रि विश्राम के बाद पक्षी प्रतिदिन सुबह खीचन के चुग्गाघर में पहुंचकर चुग्गा लेना शुरू करेंगे। इस दौरान खीचन में कुरजां की अठखेलियों को देखने के लिए पर्यटकों का तांता लगना शुरू हो जाएगा।


6 माह का होगा प्रवास

कुरजां प्रतिवर्ष सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में खीचन पहुंच जाती है तथा मार्च में वतन वापसी की उड़ान भरती है। इस दौरान छह माह के शीतकालीन प्रवास में ये पक्षी यहां हजारों की तादाद में एकत्रित होकर खीचन को पर्यटक स्थल का रूप दे देते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रवासी पक्षी कुरजा के आगमन के साथ ही फलोदी क्षेत्र में देसी- विदेशी पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ जाती है।