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दस दिन में दो की जान लेने वाले इस हाई-वे पर जल्दबाजी में लिया ये निर्णय, इसी रास्ते पर पड़ते हैं देश के प्रमुख शिक्षण संस्था

- 8 उच्च शिक्षण संस्थाओं के करीब 4 हजार विद्यार्थी रोज गुजरते हैं इस हाई-वे से  

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जोधपुर. जोधपुर-नागौर हाई-वे पर 10 दिन में एक युवक व छात्रा की मौत के बाद जिम्मेदार हरकत में आए और आनन फानन में शुक्रवार देर रात 7 संकेतक लगाए। हालांकि जल्दबाजी में कॉलेज की बजाए स्कूल के संकेतक लगा दिए। इनमें एनएलयू, एफडीडीआइ, अम्बेडकर स्कूल, थाने के पास व अन्य तीन जगह शामिल हैं। ढाई साल में 38 की मौत और 8 शिक्षण संस्थानों के करीब 4 हजार विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विभाग ने अब तक स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए हैं। दस दिन में दो युवाओं की मौत के बाद भी विभाग के नहीं जागने का कारण पूछा तो एनएच के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि उन्हें अभी तक ट्रैफिक एडवाइजरी मैनेजमेंट कमेटी और शिक्षण संस्थानों की तरफ से स्पीड ब्रेकर की समस्या के बारे में बताया ही नहीं गया है।

जबकि एफडीडीआइ के जिम्मेदारों का कहना है कि वे अब तक तीन बार शिकायत कर चुके हैं। हर रोज 3985 विद्यार्थी गुजरते हैं हाई-वे से आठ उच्च शिक्षण संस्थाओं के 3985 छात्र हर रोज जान जोखिम में डाल इसी हाई-वे से कॉलेज जाते हैं। इस कारण हाई-वे को एजुकेशन हाई-वे भी कहा जाता है। इनमें आईआईटी में 700, एनएलयू में 750, एनआईएफटी में 650, आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 800, कृषि विश्वविद्यालय में 235, एफडीडीआइ 150, पुलिस विश्वविद्यालय 140 व डॉ भीमराव अम्बेडकर स्कूल में 560 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं।

यहां रहती है जान जोखिम में


इनके लिए सबसे ज्यादा जोखिम कॉलेज के बाहर सिटी बस का इंतजार करते समय रहती है। रोड पर कहीं भी सिटी बस स्टॉप भी नहीं हैं। इस कारण छात्रों को रोड के पास खड़े रहकर सिटी बस का इंतजार करना पड़ता है।

पत्थर व बजरी से भरे ट्रकों का ट्रैफिक सबसे बड़ा खतरा


शहर से पत्थर व बजरी के सभी ट्रक इसी हाई-वे से गुजरते हैं। बालसमंद की खदानों से पत्थर लोड कर ट्रक रात आठ बजे हाई-वे से निकलते हैं। वहीं अवैध बजरी से भरे ट्रक बनाड से मंडोर होकर शहर में आते हैं। पुलिस से बचने के लिए ट्रक ड्राइवर तेज रफ्तार में निकलते हैं। इस कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। इसके अलावा मंडोर नो मील में स्टोन पार्क है। जहां करीब 70 से 80 स्टोन पार्क बने हैं। माइन से पत्थर स्टोन पार्क में लाने के लिए दिनभर ट्रकों की आवाजाही रहती हैं। रात 11 बजे कृषि मंडी से ट्रक माल लोड कर शहर से बाहर निकलते हैं।

एनएच अधीक्षण अभियंता सुधीर माथुर से सीधी बात

सवाल : हाई-वे पर 10 दिन में दो युवाओं की मौत हो गई, लेकिन साइन बोर्ड शुक्रवार देर रात लगाए ?
जवाब : हाई-वे का काम अभी बाकी है, हम बाद में लगाने वाले थे। लेकिन हादसों का पता लगा तो रात को ही लगा दिए।


सवाल : एफडीडीआइ ने तीन बार शिकायत कर स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड लगाने की मांग की थी?
जवाब : मुझे तो उन्होंने बताया नहीं, बताते तो हम पहले ही लगा देते।


सवाल : 8 उच्च शिक्षण संस्थाओं के 3985 छात्रों की जान जोखिम में रहती है, स्पीड ब्रेकर कब बनेंगे?
जवाब : ट्रैफिक एडवाइजरी मैनेजमेंट कमेटी से अभी तक स्पीड ब्रेकर के बारे में कोई निर्देश नहीं आए हैं। पहले कोई शिकायत करता तो हम लगा देते। अब ट्रांसपोर्ट कमेटी से बात कर जल्द ही स्पीड ब्रेकर बनवाएंगे।