सर प्रताप की यादगार शिप हाउस बन सकता है पर्यटन स्थल

सर प्रताप की यादगार शिप हाउस बन सकता है पर्यटन स्थल

M.I. Zahir | Publish: Jul, 13 2018 06:06:35 PM (IST) | Updated: Jul, 13 2018 07:07:21 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

राज्य की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर में यूं तो कई पर्यटन स्थल हैं, लेकिन कुछ ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिनकी मरम्मत और सारसंभाल कर उन इमारतों को अच्छे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। ऐसी ही एक नायाब, खूबसूरत और शानदार इमारत है शिप हाउस।

 

जोधप़ुर. आपने समंदर की लहरों पर तैरते हुए पानी के जहाज तो देखे होंगे, लेकिन जोधपुर शहर में पत्थरों का बना पानी का एक अनूठा और दिलचस्प जहाज है। यह शिप की शक्ल का जहाज चट्टान पर बना हुआ है। खास बात यह है कि यह जोधपुर शहर में पुरा महत्व की खूबसूरत और लाजवाब इमारत है, इसे शिप हाउस कहते हैं। यह इमारत चट्टान को काट कर बनाई गई थी। इसे बिल्कुल पानी के जहाज की तरह डिजाइन किया गया है।

सर प्रताप ने अपने रहने के लिए बनवाया था
इतिहास के अनुसार महाराजा सर प्रतापसिंह ने 1886 ई. में नागौरी गेट के पास एक छोटी सी पहाड़ी पर शिप हाउस बनवाया था। यह उन्होंने अपने रहने के लिए बनवाया था। इसका नक्श जी.जे. ओवरीन ने बनाया था और राज्य के प्रमुख अभियंता होम के निर्देशन में कलात्मक शिप हाउस बना था। यह भवन निर्माण कला का भी अदभुत नमूना है। पानी के जहाज के आकार का होने के कारण इस इमारत को शिप हाउस कहा जाता है। यह तीन मंजिला नायाब इमारत शहर के लिए खूबसूरत भवन है।

कुछ समय रहे थे सर प्रताप
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के अनुसार सर प्रताप कदाचित देसी रियासतों के शासक वर्ग में ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने उस जमाने में शांति और युद्ध दोनों अवसरों पर सबसे अधिक विदेश यात्राएं की थी। तब विदेश यात्राएं पानी के जहाज से ही होती थीं। सर प्रताप शिप हाउस की इस इमारत में रहने भी लगे थे, मगर कुछ समय बाद उनके एक अंग्रेज मित्र ने सलाह दी कि वे इसमें न रहें,क्यों कि जोधपुर में हवा की गति प्राय: पश्चिम से पूर्व की ओर रहती है और यह शिप हाउस नगर की आबादी के पूर्व में है और सारे शहर की प्रदूषित वायु इधर ही आएगी।इस पर सर प्रताप ने शिप हाउस में रहना छोड़ दिया।

कभी रेडियो स्टेशन भी था
शिप हाउस में 25 जनवरी 1949 को जोधपुर ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन का उद्घाटन किया गया जो कुछ वर्षों तक चला। यहां प्रख्यात सरोदवादक उस्ताद अली अकबर खां संगीत विभाग और मशहूर शायर रमजी इटावी उर्दू सेक्शन के इंचार्ज थे। आजादी के बाद यहां कई सरकारी विभाग भी रहे और कुछ फिल्मों की शूटिंग भी हुई, मगर अब शिप हाउस पर जाने का मार्ग ही बहुत खराब हो चुका है।

अच्छी हालत थी, अब बुरी हालत
इस भवन तक पहुंचने के लिए कभी रैलिंग लगी थी और सड़क भी बहुत अच्छी थी, यहां खड़े होने पर पानी के किसी जहाज के डैक का सा एहसास होता था, मगर अब यहां झाडिय़ां उग आई हैं और नीचे तो हर समय कचरा रहता है। जिला प्रशासन ने इसकी दशा सुधारने के लिए योजनाएं भी बनाईं, मगर हुआ कुछ भी नहीं। पहले यहां कचरा डाला जाता था, मगर अब कुछ दिनों से मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की ओर से यहां सड़क किनारे पर चौकीदार की ड्यूटी लगा दी गई है कि कोई कचरा न फेंके। अफसोस की बात यह है कि एक खूबसूरत इमारत जो अच्छा पर्यटन स्थल बन सकती है, लेकिन सुनसान और वीरान पड़ी है। यहां अब कोई नहीं रहता। इसका टिकट लगा कर इसे एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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हथियारों का संग्रहालय बनाने का विचार
हां, शिप हाउस एक पर्यटन स्थल बन सकता है। हमारा यहां पर हथियारों का संग्रहालय बनाने का विचार है। प्रक्रियागत जटिलताएं और दूसरी दिक्कतें दूर होने पर इसे अमली जामा पहनाया जाएगा। फिलहाल इसके रखरखाव का कार्य किया जा रहा है।
-करणीसिंह जसोल
निदेशक, मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट
जोधपुर

 

 

 

 

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