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सूर्यनगरी में सूर्यग्रहण से दिन में ही होगा अंधेरा

रात 10.08 बजे से ग्रहण सूतक शुरू, जोधपुर में रविवार को सूर्यग्रहण की अवधि रहेगी 3 घंटे 28 मिनट
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सूर्यनगरी में सूर्यग्रहण से दिन में ही होगा अंधेरा

सूर्यनगरी में सूर्यग्रहण से दिन में ही होगा अंधेरा

जोधपुर. भारत में रविवार को दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण का स्पर्श जोधपुर में सुबह 10.08 और मध्य 11.47 तथा मोक्ष दोपहर 1.36 पर होगा। करीब 3 घंटे 28 मिनट अवधि वाले सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पूर्व शनिवार रात्रि 10.08 से शुरू हो गया। सूर्य ग्रहण के अवधिकाल में एक साथ 6 ग्रह बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु वक्री रहेंगे । अत: इन राशि वाले जातकों को ग्रहण के समय संयम,ध्यान व जाप करना चाहिए। पंडित ओम दत्त शंकर के अनुसार जोधपुर में यह 91 प्रतिशत परम ग्रास रहेगा ।

मारवाड़ के विभिन्न जगहों पर सूर्यग्रहण की अवधि
स्थान----------प्रारंभ ------मध्य----------समाप्त
जैसलमेर-------10.05------11.42------1.29
जालोर---------10.06------11.44------1.34
मारवाड़ जं.-----10.08------11.48------1.37
पाली ----------10.08-----11.47-------1.36
नागौर----------10.10-----11.49-------1.38
आबू----------10.05-----11.44--------1.34
बाड़मेर----------10.04-----11.41------1.30
भीनमाल----------10.05-----11.43-----1.32

ग्रहणकाल में क्या करे क्या ना करे
रविवार को होने जा रहा कंकणाकृति सूर्यग्रहण मंत्रों की सिद्धि के लिए बेहद खास माना जा रहा है । इस दिन गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ व मंत्र जाप करने से मनचाही सिद्धियां प्राप्त होती है। गणपति अथर्व शीर्ष में लिखा है कि पवित्र नदी के तट पर अथवा प्रतिमा के निकट मंत्रों का जाप करने से साधक का मंत्र सिद्ध होता है। सूर्य ग्रहण आरंभ से पहले स्नान कर ध्यान मुद्रा में बैठकर गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से संकल्पित कार्य की सिद्धि प्राप्त होती है । ग्रहण के दौरान मध्यकाल में अपने इष्ट देव की अर्चना करने का भी विधान है। सूर्यनगरी के प्रमुख ज्योतिषियों के अनुसार जाप करते समय किसी भी प्रकार की माला का उपयोग नही होना चाहिए। सूतक काल के दौरान मूर्ति का दर्शन, स्पर्श एवं भोजन करना, बेवजह घूमना आदि भी वर्जित बताया गया है। ग्रहण मोक्ष काल के बाद स्नान आदि कर नित्य पूजा कर्म कर ही भोजन आदि ग्रहण करना चाहिए।ज्योतिर्विद पंडित मुकेश दाधीच के अनुसार ग्रहण सूतक काल में कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। सूतक व ग्रहण काल में मूर्ति का स्पर्श,अनावश्यक भोजन, मैथुन, निद्रा, नाखून काटना आदि वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वृद्ध, रोगी, बालक, गर्भवती स्त्रियों को भोजन, दवाई ग्रहण करने का दोष नहीं लगता है। ग्रहणकाल में गर्भवती महिलाओं को धार्मिक ग्रंथो का पाठ करना चाहिए।