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खीचन में पहली बार सोलर सिस्टम ट्रासंमीटर लगी मिली कुरजां

महेश कुमार सोनीफलोदी. सात समन्दर पार कर प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां यहां खीचन में पक्षियों पर अनुसंधान की संभावनाएं बना रहे है। दरअसल सोमवार सुबह खीचन स्थित पक्षी चुग्गाघर में कुरजां के समूहों के दाना लेते समय एक कुरजां पक्षी के टांग में रिंगिंग कॉलर तथा दूसरी टांग पर सोलर सिस्टम ट्रांसमीटर लगा दिखा है। कुरजां पर यह उपकरण उनके प्रवसन मार्गाें पर शोध के लिए लगाए जाते है। गौरतलब है कि खीचन पहली बार एैसा कुरजां पक्षी मिला है जिसके टांग में सोलर सिस्टम ट्रांसमीटर लगा है। अब तक सिर्फ रिंगिंग कॉलर लगे पक्षी ही मिले है।
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खीचन में पहली बार सोलर सिस्टम ट्रासंमीटर लगी मिली कुरजां

एक टांग पर ट्रांसमीटर, दूसरी पर रिंगिंग कॉलर-
पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि सोमवार सुबह पक्षी चुग्गाघर में कुरजां के समूह दाना ले रहे थे। इस दौरान वहां उपस्थित विमला व नेहा की नजर एक एैसी कुरजां पर पड़ी। जिसके पैर में रिंगिंग कॉलर लगा था। जिस पर इस कुरजां की काफी देर तक तलाश की गई तथा फोटोग्राफी का प्रयास किया गया। इस दौरान यह कुरजां फिर से नजर आई। जिसके एक पैर पर हरे व काले रंग के अलग-अलग दो रिंगिंग कॉलर लगे है तथा दूसरे पैर पर एक छोटे सोलर पैनल जैसा सफेद उपकरण लगा दिखा। उन्होंने बताया कि इस सीजन में यह दूसरी कुरजां मिली है, जिसे विशेषज्ञों द्वारा टैग किया गया है।
कब-कब मिले टैग किए हुए पक्षी-

4 फरवरी 2019

15 दिसम्बर 2018

7 फरवरी 2017
एैसे काम करता है ट्रांसमीटर-
कुरजां के पैर में लगे सोलर सिस्टम ट्रांसमीटर के साथ जीपीएस भी होता है। यह पक्षी अलग-अलग स्थानों पर जाने के साथ ही अपने प्रवसन मार्ग की जानकारी सैटेलाइट को भेजता है तथा सैटेलाइट से यह जानकारी संबंधित वैज्ञानिक तक पंहुचती है। साथ ही पैर में लगे रिंग टैग किए गए पक्षी को पहचानने में सुविधा प्रदान करते है।
विशेषज्ञों से किया जा रहा है सम्पर्क-
खीचन में सोलर सिस्टम ट्रांसमीटर लगे कुरजां पक्षी के मिलने के बाद उसके फोटो पक्षी विशेषज्ञों व शोध संस्थानों को भेजे गए है। जल्द ही इस पक्षी को टैग करने वाले स्थान व वैज्ञानिक की जानकारी प्राप्त होने की उम्मीद है।

डॉ. गोपी के एस सुन्दर, निदेशक, सारस स्कैप प्रोजेक्ट, इंटरनेशनल क्रैन फाउण्डेशन
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