
जोधपुर. निजी स्कूलों की मनमानी लगातार चलती आ रही है। फीस को लेकर कई नियम-कायदे बने। उसके बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी जारी रही। फीस समितियों में मनचाहे अभिभावकों को ही स्कूल संचालकों ने लिया। इन कारिस्तानियों को जानते हुए भी निजी स्कूलों के खिलाफ कई शिक्षक व अभिभावक शांत बैठे रहे। निजी स्कूलों के शिक्षकों को भय रहता है कि कहीं ज्यादा विरोध करने पर उन्हें स्कूल से ना निकाल दिया जाए। वहीं अभिभावकों को चिंता रहती है कि उन्होंने ज्यादा आवाज की तो उसका खामियाजा उनके बच्च्चे को भुगतना पड़ सकता है।
कोरोनाकाल में नौकरियां भी नहीं मिल रही
भीतरी शहर निवासी निजी स्कूल शिक्षक हितेन्द्र (बदला हुआ नाम ) ने खुद का नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि वे शहर की एक नामचीन स्कूल में काम करते है। ज्यादातर स्कूल संचालक व उनके नातेदार ही स्कूल में पंचायती करते है। निजी स्कूलों ने बच्चों की फीस के नाम पर लूट मचा रखी है। उसका 50 फीसदी हिस्सा भी स्कूल संचालक अपने स्टाफ को तनख्वाह में नहीं देते। इन दिनों कोरोनाकाल में भी शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है। जबकि अधिकत्तर बच्चों की 50 फीसदी फीस आ चुकी है। उसके बावजूद स्टाफ को उस अनुरूप सैलेरी नहीं दी जा रही है। ज्यादा आवाज करने पर उन्हें स्कूल से रवाना करने की धमकियां तक दी जाती है। अभिभावक रूपेश ने बताया कि निजी स्कूल में एक सब्जैक्ट पर शिक्षक आधे घंटे बच्चे पर मेहनत करते है। जबकि वे घर में पर्टिकुलर एक सब्जैक्ट पर बच्चे को एक घंटा पढ़ाते है। स्कूल में पढ़ाई को लेकर शिकायत करने पर उल्टा स्टाफ बच्चों की गलतियां निकालना शुरू कर देता है। अक्सर बच्चे के भविष्य की खातिर उन्हें चुप रहना पड़ता है।
Published on:
10 Nov 2020 11:07 pm
